हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि, डॉ. अंशु शर्मा को AICTE की दो शोध परियोजनाएं मंजूर

Update: 2026-07-28 04:56 GMT

महेंद्रगढ़: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ ने अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के अनुप्रयुक्त विज्ञान एवं मानविकी विभाग के भौतिकी विषय की सहायक आचार्य डॉ. अंशु शर्मा को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), भारत सरकार की प्रतिष्ठित रिसर्च प्रमोशन स्कीम (आरपीएस) लैब टू मार्केट 2025 के तहत दो महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं के लिए मंजूरी मिली है।

इन दोनों शोध परियोजनाओं के लिए डॉ. अंशु शर्मा को कुल 60 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान प्रदान किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे संस्थान की बढ़ती शोध क्षमता, वैज्ञानिक सोच और नवाचार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की बड़ी उपलब्धि बताया है।

एआईसीटीई की रिसर्च प्रमोशन स्कीम का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देना और ऐसे अनुसंधानों को प्रोत्साहित करना है, जिनका उपयोग समाज और उद्योग के लिए किया जा सके। लैब टू मार्केट योजना विशेष रूप से उन शोध कार्यों को बढ़ावा देती है, जिनके जरिए प्रयोगशाला में विकसित तकनीक या खोज को व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाया जा सके।

डॉ. अंशु शर्मा को मिली दोनों परियोजनाएं भौतिकी और अनुप्रयुक्त विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने वाली हैं। इन शोध परियोजनाओं के माध्यम से नई तकनीकों के विकास और उनके व्यावहारिक उपयोग की दिशा में काम किया जाएगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल शोध गतिविधियों को गति मिलेगी, बल्कि विद्यार्थियों को भी अत्याधुनिक शोध कार्यों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि इतनी बड़ी राशि का शोध अनुदान मिलना संस्थान के लिए गौरव का विषय है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे शोध वातावरण और शिक्षकों द्वारा किए जा रहे गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को दर्शाती है।

हकेवि लगातार विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। विश्वविद्यालय में विभिन्न विभागों के शिक्षक और शोधार्थी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। शोध अनुदान मिलने से विश्वविद्यालय में प्रयोगशालाओं को मजबूत करने, नई तकनीकों पर काम करने और शोध परिणामों को उपयोगी रूप देने में मदद मिलेगी।

डॉ. अंशु शर्मा ने इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय के सहयोग और शोध के लिए अनुकूल वातावरण का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि इस अनुदान के माध्यम से स्वीकृत परियोजनाओं पर बेहतर तरीके से काम किया जा सकेगा और इनके परिणामों को समाज तथा उद्योग के लिए उपयोगी बनाया जाएगा।

शोध परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी लाभ मिलेगा। उन्हें आधुनिक उपकरणों, नई तकनीकों और शोध की नवीनतम प्रक्रियाओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना संस्थान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों को शोध परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं के तहत मिलने वाली ऐसी स्वीकृतियां विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

एआईसीटीई की ओर से मिलने वाला यह अनुदान डॉ. अंशु शर्मा के शोध कार्यों को नई दिशा देगा। इससे प्रयोगशाला स्तर पर विकसित होने वाली तकनीकों को वास्तविक उपयोग तक पहुंचाने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, यह विश्वविद्यालय के लिए उद्योग और शोध संस्थानों के साथ सहयोग के नए अवसर भी खोल सकता है।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में उच्च शिक्षा संस्थानों की पहचान केवल शिक्षण कार्य से नहीं, बल्कि शोध और नवाचार की क्षमता से भी होती है। ऐसे में किसी विश्वविद्यालय के शिक्षक को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित योजना के तहत शोध परियोजनाओं की मंजूरी मिलना संस्थान की गुणवत्ता और वैज्ञानिक योगदान को दर्शाता है।

हकेवि महेंद्रगढ़ ने पिछले कुछ वर्षों में अनुसंधान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विश्वविद्यालय में शोध परियोजनाओं को बढ़ावा देने, विद्यार्थियों को अनुसंधान के लिए प्रेरित करने और आधुनिक तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

डॉ. अंशु शर्मा को मिली यह सफलता विश्वविद्यालय के लिए एक नई उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है। दो शोध परियोजनाओं के लिए 60 लाख रुपये का अनुदान मिलने से न केवल उनके शोध कार्यों को मजबूती मिलेगी, बल्कि विश्वविद्यालय की नवाचार क्षमता को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि पर डॉ. अंशु शर्मा को बधाई दी और उम्मीद जताई कि आने वाले समय में हकेवि से और अधिक महत्वपूर्ण शोध कार्य सामने आएंगे। यह उपलब्धि संस्थान में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने और नई तकनीकों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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