हिसार: प्राथमिक पाठशाला गैबीपुर में शिक्षकों की भारी कमी के चलते शुक्रवार को अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। यहां 361 विद्यार्थियों पर महज तीन शिक्षक होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और तालाबंदी की तैयारी शुरू कर दी। अधिकारियों से बातचीत के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल तीन दिन का समय देकर तालाबंदी टाल दी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि इस अवधि में शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे।

अभिभावक कमलेश ने कहा कि बच्चे स्कूल दाल-चावल खाने के लिए नहीं, पढ़ाई करने के लिए आते हैं। खाना तो घर में भी मिल सकता है, लेकिन बच्चों के भविष्य के लिए पर्याप्त शिक्षक जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की कमी से बच्चों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है।

अभिभावक चमेली ने आरोप लगाया कि शिक्षकों की कमी के कारण पांचवीं कक्षा के बच्चे दूसरी कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि जो बच्चे खुद पढ़ने के लिए स्कूल आते हैं, उन्हें ही दूसरे बच्चों को पढ़ाने में लगा दिया जाता है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

अभिभावक दीपक कुमार ने कहा कि डेपुटेशन पर लगाए गए शिक्षकों को हटाए जाने के बाद यह स्थिति बनी है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा से स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।

गांव निवासी विजय कुमार ने कहा कि स्कूल में करीब 14 शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन तीन शिक्षक ही उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए।

एसएमसी प्रधान ममता ने कहा कि यदि तीन दिन में शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हुई तो ग्रामीण अगला कदम उठाएंगे। उन्होंने डेपुटेशन पर पहले तैनात शिक्षकों को दोबारा स्कूल में लगाने की मांग की। खंड शिक्षा अधिकारी जिले सिंह ने कहा कि शिक्षकों की कमी का मामला उच्च अधिकारियों और सरकार के संज्ञान में है। उन्होंने बताया कि महानिदेशक, शिक्षा विभाग के आदेशों के तहत डेपुटेशन पर लगाए गए शिक्षकों की डेपुटेशन रद्द होने के बाद यह स्थिति बनी है।

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