CWG 2026 में चमका हरियाणा का धनाना गांव, दो बेटियों ने जीते पदक

Update: 2026-08-01 15:46 GMT

भिवानी। हरियाणा का धनाना गांव इन दिनों अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। छोटे से गांव की दो बेटियों ने राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतकर न केवल अपने गांव बल्कि पूरे हरियाणा का नाम रोशन किया है। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में साक्षी चौधरी ढांडा और प्रिया घनघस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक हासिल किए, जिसके बाद धनाना गांव की पहचान खेलों के क्षेत्र में और मजबूत हो गई है।

भिवानी जिले के इस गांव को पहले से ही खेल प्रतिभाओं की धरती माना जाता है। मिनी क्यूबा भिवानी के आसपास स्थित धनाना गांव ने वर्षों से देश को कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। यहां के खिलाड़ियों ने मुक्केबाजी, हैंडबाल, कबड्डी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

धनाना गांव से अर्जुन अवार्डी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज नीतू घनघस भी निकल चुकी हैं। इसके अलावा हरियाणा बनने के बाद के पहले ओलंपियन एथलीट भीम सिंह भी इसी गांव से जुड़े हैं। खेल के क्षेत्र में लगातार मिल रही सफलताओं के कारण अब धनाना गांव को खेलों के हब के रूप में पहचान मिलने लगी है।

गांव में भले ही अभी तक कोई बड़ा स्टेडियम नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों का जुनून किसी बड़े प्रशिक्षण केंद्र से कम नहीं है। सुबह और शाम गांव के स्कूल मैदानों में बड़ी संख्या में खिलाड़ी अभ्यास करते नजर आते हैं। वीर शहीद लख्मीचंद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के मैदान में लड़के और वीर शहीद हुकमीराम राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के मैदान में लड़कियां नियमित रूप से पसीना बहाती हैं।

गांव में करीब 500 से 600 खिलाड़ी रोजाना अलग-अलग खेलों की तैयारी करते हैं। यही मेहनत और खेल के प्रति समर्पण धनाना को देश के नक्शे पर अलग पहचान दिला रहा है।

धनाना गांव ने कई बड़े खिलाड़ी और खेल प्रशिक्षक देश को दिए हैं। अर्जुन अवार्डी भीम सिंह भारतीय खेल प्राधिकरण में चीफ कोच रह चुके हैं। वहीं रामेहर सिंह अर्जुन अवार्डी होने के साथ भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और मुख्य कोच भी रहे हैं। भूपेंद्र सिंह भी भारतीय खेल प्राधिकरण में चीफ कोच की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

मुक्केबाजी के अलावा धनाना गांव हैंडबाल के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान रखता है। गांव में हैंडबाल की नींव वर्ष 1998 में स्वर्गीय कुलजीत सिंह शिपा ने रखी थी। उन्होंने भारतीय सेना में रहते हुए गांव के युवाओं को इस खेल से जोड़ा और धीरे-धीरे यह खेल गांव की पहचान बन गया।

हैंडबाल कोच फूल सिंह के अनुसार, आज धनाना गांव में 55 से 60 अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैंडबाल खिलाड़ी और करीब 450 राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। गांव के लगभग 180 हैंडबाल खिलाड़ी सरकारी नौकरियों में भी अपनी जगह बना चुके हैं।

धनाना गांव की आबादी करीब 22 हजार है और यहां लगभग 2500 घर हैं। गांव में तीन पंचायतें, दो राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, तीन प्राथमिक विद्यालय और एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है। सीमित संसाधनों के बावजूद यहां के युवाओं ने खेलों में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।

राष्ट्रमंडल खेलों में साक्षी चौधरी ढांडा और प्रिया घनघस की सफलता के बाद पूरे गांव में जश्न का माहौल है। पंचायतों और ग्रामीणों ने बेटियों की उपलब्धि पर खुशी जताई है। गांव के लोगों का कहना है कि यहां के युवाओं में खेलों के प्रति जबरदस्त जुनून है और आने वाले समय में धनाना से कई और खिलाड़ी देश का नाम रोशन करेंगे।

धनाना गांव की कहानी यह साबित करती है कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर छोटे गांव भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं। यहां के खिलाड़ियों की उपलब्धियां देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

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