हरियाणा Haryana: हरियाणा खेल के क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा है, जहाँ के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतकर राज्य और देश का नाम रोशन किया है, लेकिन साथ ही राज्य में खेलों से जुड़े विवादों और सामाजिक चुनौतियों ने इसकी छवि को धूमिल भी किया है।
उपलब्धियाँ: मेडल जीतने की कहानी
खेलों का पावरहाउस: हरियाणा को अक्सर "भारतीय खेलों की नर्सरी" कहा जाता है। भारत के कुल पदकों में से लगभग एक-तिहाई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हरियाणा के खिलाड़ियों द्वारा जीते जाते हैं। ओलंपिक और राष्ट्रीय गौरव: नीरज चोपड़ा (भाला फेंक), साक्षी मलिक (कुश्ती), गीता फोगट (कुश्ती), और दीपा मलिक (पैरा-एथलीट) जैसे खिलाड़ियों ने ओलंपिक, राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का मान बढ़ाया है। सरकारी प्रोत्साहन: हरियाणा सरकार ने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ₹51,000 से लेकर ₹6 करोड़ तक की नकद प्रोत्साहन राशि और सरकारी नौकरियाँ प्रदान करने की नीति अपनाई है, जिससे खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से मजबूती मिली है। सामाजिक परिवर्तन: महिला खिलाड़ियों की सफलता ने कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों के लिए कुख्यात रहे राज्य में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बनकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव लाने में मदद की है।
चुनौतियाँ: बदनामी से लड़ने का संघर्ष
यौन उत्पीड़न के आरोप: हरियाणा के खेल मंत्री रहे संदीप सिंह पर एक जूनियर महिला कोच ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए, जिससे राज्य के खेल प्रशासन में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इस मामले ने महिला एथलीटों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। खराब बुनियादी ढाँचा: हाल ही में दो बास्केटबॉल खिलाड़ियों की खेल के दौरान खराब बुनियादी ढांचे (जर्जर पोल गिरने) के कारण मौत हो गई, जिससे स्टेडियमों में सुरक्षा ऑडिट और सुविधाओं की कमी उजागर हुई। भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन: खेल विभाग में भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप भी लगे हैं, जिससे खिलाड़ियों को उचित डाइट और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सामाजिक कलंक और शोषण: महिला खिलाड़ियों को अक्सर सामाजिक कलंक और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जिससे कई बार वे खेल छोड़ने पर मजबूर हो जाती हैं।