Gurugram ECHO ASIA / ECHO INDIA 2026 में एक्सपर्ट्स ने कहा कि दिल में शुरुआती बदलाव लक्षण दिखने से पहले ही शुरू हो सकते हैं। उन्होंने छाती में दर्द या सांस फूलने जैसे लक्षणों का इंतज़ार करने के बजाय, एडवांस्ड कार्डियक इमेजिंग के ज़रिए शुरुआती स्टेज में ही दिल से जुड़े जोखिमों का पता लगाने के महत्व पर ज़ोर दिया। गुरुग्राम के द लीला एम्बिएंस में आज से 11 अक्टूबर तक चल रही ECHO ASIA / ECHO INDIA 2026 कॉन्फ्रेंस में एक्सपर्ट्स ने साइलेंट हार्ट डिज़ीज़, स्टेज B हार्ट फेलियर, डायबिटीज़ से जुड़े दिल के जोखिमों और कार्डियक इमेजिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर चर्चा की।
यह कॉन्फ्रेंस एशियन-पैसिफिक एसोसिएशन ऑफ़ इकोकार्डियोग्राफी (AAE) और इंडियन एकेडमी ऑफ़ इकोकार्डियोग्राफी (IAE) द्वारा "शेपिंग द न्यू एरा ऑफ़ कार्डियक इमेजिंग" (कार्डियक इमेजिंग के नए दौर को आकार देना) थीम के तहत आयोजित की जा रही है। भारत और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के एक्सपर्ट्स कार्डियक इमेजिंग, रिसर्च और इनोवेशन पर चर्चा में हिस्सा ले रहे हैं।
इंडियन एकेडमी ऑफ़ इकोकार्डियोग्राफी (IAE) के एग्जीक्यूटिव ऑर्गेनाइज़िंग प्रेसिडेंट डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा, "जब दिल की बीमारी की बात आती है, तो लक्षणों का इंतज़ार करना हमेशा सही तरीका नहीं होता है। एडवांस्ड इमेजिंग हमें शुरुआती स्टेज में ही दिल की बनावट और कामकाज में होने वाले बदलावों का पता लगाने में मदद कर सकती है।" IAE की साइंटिफिक कमेटी की चेयरपर्सन डॉ. हंसा गुप्ता ने कहा, "इकोकार्डियोग्राफी और स्ट्रेन इमेजिंग जैसे टेस्ट हमें दिल के कामकाज में शुरुआती बदलावों का पता लगाने और उन्हें समझने में मदद कर सकते हैं।"
IAE के इंटरनेशनल चेयरमैन डॉ. जे ओह ने कहा, "डायबिटीज़ और दिल की बीमारियों का गहरा संबंध है, और भारत में डायबिटीज़ का बोझ बहुत ज़्यादा है। डायबिटीज़ धीरे-धीरे शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित करती है, और दिल भी इससे अछूता नहीं है। इमेजिंग हमें शुरुआती स्टेज में ही दिल की बनावट और कामकाज में होने वाले बदलावों को समझने में मदद कर सकती है।" IAE के इंटरनेशनल चेयरमैन डॉ. एस. के. पराशर ने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मकसद डॉक्टरों की जगह लेना नहीं है; बल्कि उनकी मदद करना है। इकोकार्डियोग्राफी में, AI इमेज का विश्लेषण करने, ज़रूरी माप लेने और कुछ असामान्य चीज़ों का पता लगाने में मदद कर सकता है।"