Hariyana हरियाणा। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भारत को 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी मिलने पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश को इस अवसर पर गर्व होना चाहिए कि भारत अंतरराष्ट्रीय खेलों का आयोजन कर रहा है, लेकिन भारत सरकार के फैसले पर सवाल उठाए बिना नहीं रहा जा सकता। हुड्डा ने विशेष रूप से गुजरात में 28 प्रदेशों के बीच मेज़बानी मिलने के निर्णय पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि खेल बजट और ढांचे के हिसाब से राष्ट्रीय राजधानी या खेल की राजधानी के रूप में हरियाणा इस आयोजन के लिए अधिक उपयुक्त होता। उन्होंने पूछा कि किस मापदंड और मेरिट के आधार पर गुजरात को चयनित किया गया। उनका कहना था कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हरियाणा की उपेक्षा उचित नहीं है। 

दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि देश की सरकार को राजधर्म का पालन करना चाहिए और 28 प्रदेशों में किसी एक राज्य को यह अवसर दिया जाए तो अन्य राज्यों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि खेलों के अवसर पर राज्यों की बराबरी और निष्पक्षता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि खेल केवल राष्ट्रीय गौरव का विषय नहीं है, बल्कि यह स्थानीय खेल संरचना और खिलाड़ियों के विकास का भी मामला है। यदि यह आयोजन हरियाणा में होता तो राज्य के खिलाड़ियों और खेल संस्थाओं को सीधे लाभ मिलता और खेल विकास के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता। 

हुड्डा ने सरकार से आग्रह किया कि भविष्य में ऐसे निर्णय लेते समय राज्यों के योगदान, खेल संरचना और खेलकूद के विकास को ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि खेल आयोजन में केवल एक राज्य को प्रमुखता देने से अन्य राज्यों की प्रतिभा और अवसर प्रभावित होते हैं। इस अवसर पर उन्होंने यह भी जोड़ा कि हरियाणा के खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार भविष्य में खेलों के समान अवसर देने और सभी राज्यों के विकास को संतुलित तरीके से सुनिश्चित करने पर ध्यान देगी।
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