657 करोड़ के IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले को लेकर कांग्रेस का आरोप

Update: 2026-06-25 04:04 GMT

Haryana हरियाणा: कांग्रेस ने बुधवार को 657 करोड़ रुपये के IDFC फर्स्ट बैंक कथित घोटाले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि सरकार ने मार्च 2024 के राज्यसभा चुनावों में अपने समर्थित उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए एक “भ्रष्ट” IAS अधिकारी को रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के रूप में नियुक्त किया था।

इस मुद्दे पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस विधायक दल के उप-नेता आफताब अहमद और हरियाणा विधानसभा के पूर्व स्पीकर अशोक अरोड़ा ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही है और प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने का प्रयास कर रही है।

कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि घोटाले की जांच और कार्रवाई को लेकर सरकार का रवैया सवालों के घेरे में है। अशोक अरोड़ा ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि अब तक इस कथित घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ विभागीय कार्रवाई क्यों शुरू नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति इस ओर इशारा करती है कि सरकार जांच प्रक्रिया को सीमित करने और कुछ लोगों को संरक्षण देने का प्रयास कर रही है।

अरोड़ा ने आगे कहा कि यदि किसी मामले में वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर आरोप सामने आते हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करे। लेकिन इस मामले में कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में न केवल वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की भी कोशिश की गई है। पार्टी ने कहा कि यदि किसी घोटाले से जुड़े अधिकारी को महत्वपूर्ण चुनावी जिम्मेदारी दी जाती है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से इस मामले में स्पष्टता और पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है। उन्होंने मांग की कि इस कथित घोटाले में शामिल सभी लोगों की भूमिका की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि जांच केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसमें सभी स्तरों पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। पार्टी ने मांग की कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए।

अशोक अरोड़ा ने कहा कि सरकार को इस मामले में तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि जांच किस स्तर पर पहुंची है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है ताकि प्रभावशाली लोगों को बचाया जा सके।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि यह मामला केवल एक वित्तीय घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासनिक पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता भी शामिल है। इसलिए इसकी जांच किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

फिलहाल इस मामले में सरकार की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाजी की संभावना जताई जा रही है।

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