Chandigarh चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बीजेपी द्वारा लगाए गए “Sheesh Mahal 2.0” (शीश महल 2.0) के आरोपों को झूठा और भ्रामक बताया। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि उन्हें चंडीगढ़ में जो सरकारी आवास आवंटित किया गया है, वह पूरी तरह से सरकारी नियमों और प्रक्रिया के तहत मिला है, और इसमें किसी तरह की कोई गड़बड़ी या विशेष सुविधा नहीं दी गई है।
बीजेपी नेताओं ने हाल ही में मुख्यमंत्री मान के चंडीगढ़ स्थित आधिकारिक निवास को “Sheesh Mahal 2.0” करार दिया था और आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ने सरकारी धन से आलीशान निर्माण कराया है। इस पर पलटवार करते हुए भगवंत मान ने कहा, “भाजपा झूठे प्रचार के जरिए लोगों को गुमराह कर रही है। यह वही पार्टी है जिसने खुद सत्ता में रहते हुए सरकारी संसाधनों का खुलकर दुरुपयोग किया। अब जब आम आदमी पार्टी पारदर्शिता से काम कर रही है, तो उन्हें यह खटक रहा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें जो आवास आवंटित किया गया है, वह पंजाब और हरियाणा हाउसिंग नियमों के अनुरूप है और इसमें कोई भी अतिरिक्त निर्माण कार्य सरकार की स्वीकृति से ही किया गया है। उन्होंने कहा, “मैं जनता के पैसे की एक-एक पाई का हिसाब देने को तैयार हूं। बीजेपी केवल अफवाहों का सहारा लेकर पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार की छवि खराब करना चाहती है।”
उन्होंने बीजेपी से सवाल किया कि “जब पिछले मुख्यमंत्रियों को समान या उससे बड़े आवास दिए गए थे, तब यह सवाल क्यों नहीं उठाए गए?” मान ने कहा कि बीजेपी का यह रवैया उसकी राजनीतिक हताशा को दिखाता है। उन्होंने कहा कि “बीजेपी को पंजाब में आम आदमी पार्टी के जनसमर्थन से डर लग रहा है, इसलिए वह झूठे नैरेटिव गढ़कर भ्रम फैलाने में जुटी है।”
भगवंत मान ने यह भी कहा कि चंडीगढ़ आवास का पूरा विवरण सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध है और किसी भी नागरिक को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत इसकी जानकारी मिल सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर काम कर रही है। सीएम मान ने कहा, “हमारा मकसद जनता के हित में काम करना है, न कि महलों में रहना। बीजेपी का ‘शीश महल 2.0’ सिर्फ उनकी मीडिया पॉलिटिक्स का हिस्सा है।”
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पंजाब में लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच यह बयानबाजी तेज हो रही है। आम आदमी पार्टी जहां खुद को आम जनता के करीब दिखाने की कोशिश कर रही है, वहीं बीजेपी लगातार उसे “विलासिता और प्रचार की राजनीति” से जोड़ने की कोशिश में है।