मुश्किलों के बीच विरल की उड़ान, इंजीनियर बनने का जज्बा कायम

Update: 2026-08-02 10:39 GMT

गुजरात, अहमदाबाद। गुजरात-अहमदाबाद में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। नवसारी और सूरत समेत कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। नवसारी जिले में रिकॉर्ड बारिश के बाद सैकड़ों घर पानी में डूब गए हैं, जबकि हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक 10 साल के बच्चे विरल की कहानी सामने आई है, जिसने मुश्किल हालात के बावजूद अपने सपनों को जिंदा रखा है।

नवसारी में शुक्रवार और शनिवार के बीच केवल 24 घंटे में 400 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। यह एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार हुई अत्यधिक बारिश थी, जिसने पूरे इलाके में भारी तबाही मचा दी। तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए और कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया। लोगों के घरों में कई फीट तक पानी घुस गया, जिससे घरेलू सामान, जरूरी दस्तावेज और अन्य चीजें खराब हो गईं।

इसी बाढ़ के बीच नवसारी के रहने वाले 10 वर्षीय विरल की कहानी लोगों का ध्यान खींच रही है। विरल का घर पूरी तरह पानी में डूब चुका है। घर का दरवाजा और बिस्तर तक टूट चुके हैं। परिवार के पास खाना बनाने के लिए भी जगह नहीं बची है, इसलिए घर का एक कमरा ही अब रसोई का काम कर रहा है।

बाढ़ के पानी में कमर तक खड़े विरल ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि यहां जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई है। घर में सब कुछ डूब गया है। खाने और पीने के साफ पानी की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया है। उसकी बहन दीपिशा को पानी लाने के लिए काफी दूर तक जाना पड़ता है। विरल ने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति दोबारा कभी न आए।

हालांकि, इतनी परेशानियों के बीच भी विरल ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उसके घर की दीवारों पर लगे मेडल उसकी मेहनत और उपलब्धियों की कहानी बताते हैं। वह पढ़ाई कर आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहता है। विरल का कहना है कि वह अपनी मां की मदद करना चाहता है और इसके लिए वह अपने सपने को पूरा करना चाहता है।

बाढ़ से प्रभावित इस मासूम बच्चे ने प्रशासन से केवल एक छोटी सी अपील की है। उसने कहा, "साहेब, बस घर बना देना।" विरल की यह बात बाढ़ की तबाही के बीच एक बच्चे की उम्मीद और संघर्ष को दिखाती है।

वहीं, नवसारी के अलावा गुजरात की डायमंड सिटी सूरत भी बाढ़ से प्रभावित हुई है। सूरत के शांतादेवी इलाके में कई डायमंड फैक्ट्रियों में पानी भर गया है। बताया जा रहा है कि करीब 300 डायमंड यूनिटों में लगभग पांच फीट तक पानी पहुंच गया, जिससे मशीनों को भारी नुकसान हुआ है। जलभराव के कारण कई फैक्ट्रियों में काम पूरी तरह बंद हो गया है।

सूरत की डायमंड इंडस्ट्री पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही थी। कई कारीगरों को सप्ताह में सीमित दिनों तक ही काम मिल रहा था। अब बारिश और बाढ़ के कारण हजारों डायमंड कारीगरों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। पिछले कई दिनों से बड़ी संख्या में मजदूर काम से दूर हैं और उनकी आय प्रभावित हुई है।

प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, कई इलाकों में अभी भी जलभराव और नुकसान के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

गुजरात की इस बाढ़ ने जहां हजारों परिवारों को संकट में डाल दिया है, वहीं विरल जैसे बच्चों की उम्मीद यह संदेश दे रही है कि कठिन परिस्थितियों में भी हौसला बनाए रखना जरूरी है। बाढ़ से घर और सामान भले ही छिन गए हों, लेकिन विरल का इंजीनियर बनने का सपना अभी भी कायम है।

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