राजकोट। गुजरात के राजकोट में ऑनलाइन ठगी और ब्लैकमेलिंग का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजकोट ग्रामीण पुलिस ने फर्जी आयुर्वेदिक डॉक्टर बनकर लोगों को जाल में फंसाने वाले गिरोह से जुड़े तीन कॉल सेंटरों का खुलासा किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य एक वेबसाइट के माध्यम से पुरुषों को यौन क्षमता बढ़ाने का झांसा देते थे। इसके बाद संपर्क करने वाले लोगों की निजी जानकारी हासिल कर उन्हें हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाया जाता था। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने करीब 2000 लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। मामले के सामने आने के बाद ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फर्जी आयुर्वेदिक डॉक्टर बनकर चल रहा था खेल
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए खुद को आयुर्वेदिक चिकित्सा से जुड़ा बताया था। गिरोह कथित तौर पर यौन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का समाधान करने और यौन क्षमता बढ़ाने का दावा करता था।
इसके लिए एक वेबसाइट का इस्तेमाल किया जा रहा था। वेबसाइट पर आने वाले लोगों को इलाज और स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं का भरोसा दिलाया जाता था।बताया जा रहा है कि इसी माध्यम से गिरोह संभावित ग्राहकों तक पहुंचता था। स्वास्थ्य से जुड़ी निजी समस्याओं के कारण कई लोग अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते। आरोपियों पर इसी संवेदनशीलता का फायदा उठाने का आरोप है।
तीन कॉल सेंटरों का हुआ खुलासा
राजकोट ग्रामीण पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े तीन कॉल सेंटरों का पता लगाया।पुलिस के अनुसार, इन कॉल सेंटरों के माध्यम से लोगों से संपर्क किया जाता था और उन्हें कथित आयुर्वेदिक उपचार के नाम पर विश्वास में लिया जाता था।आरोप है कि कॉल सेंटरों का इस्तेमाल केवल स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के प्रचार के लिए नहीं, बल्कि लोगों को ठगी के जाल में फंसाने के लिए भी किया जा रहा था।हालांकि, इन कॉल सेंटरों के सटीक स्थान, वहां काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या और गिरफ्तार आरोपियों के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
वेबसाइट के जरिए लोगों को बनाते थे निशाना
पुलिस के मुताबिक, गिरोह की ठगी का प्रमुख माध्यम एक वेबसाइट थी।इस वेबसाइट के जरिए लोगों को यौन क्षमता बढ़ाने से संबंधित दावे दिखाए जाते थे। ऐसे विज्ञापनों या प्रचार से प्रभावित होकर लोग कथित उपचार के बारे में जानकारी लेने के लिए संपर्क करते थे।आरोपियों द्वारा खुद को आयुर्वेदिक डॉक्टर बताने से लोगों को भरोसा हो सकता था कि वे किसी चिकित्सा सेवा से संपर्क कर रहे हैं।लेकिन पुलिस का आरोप है कि इस व्यवस्था के पीछे संगठित ठगी का नेटवर्क सक्रिय था।वेबसाइट का नाम और उसके संचालन से जुड़ी तकनीकी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।
हनीट्रैप में फंसाकर करते थे ब्लैकमेल
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग से जुड़ा है।पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं के बहाने संपर्क में लिया और बाद में उन्हें ब्लैकमेल किया।हनीट्रैप में किसी व्यक्ति को निजी या अंतरंग बातचीत के जरिए फंसाकर उसकी व्यक्तिगत जानकारी, तस्वीरों या अन्य संवेदनशील सामग्री का दुरुपयोग किया जा सकता है।ऐसे मामलों में पीड़ित को बदनामी या निजी जानकारी सार्वजनिक होने का डर दिखाकर पैसे मांगे जाते हैं।हालांकि, राजकोट के इस विशेष मामले में आरोपियों ने ब्लैकमेलिंग के लिए कौन-सा तरीका अपनाया, इसकी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
करीब 2000 लोगों से ठगी का दावा
राजकोट ग्रामीण पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने करीब 2000 लोगों को ठगी का शिकार बनाया है।यदि जांच में यह संख्या प्रमाणित होती है, तो यह बड़े स्तर पर संचालित ऑनलाइन धोखाधड़ी का मामला माना जाएगा।इतनी बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बनाने का आरोप इस बात की ओर संकेत करता है कि गिरोह का संचालन व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था।हालांकि, ठगी की कुल रकम, प्रत्येक पीड़ित से वसूली गई राशि और गिरोह के संचालन की अवधि के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।पुलिस की आगे की जांच में आर्थिक लेनदेन और संभावित अन्य पीड़ितों के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।
निजी समस्याओं का फायदा उठाते हैं साइबर ठग
ऑनलाइन ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर लोगों की निजी परेशानियों और भावनाओं का फायदा उठाते हैं।यौन स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं पर कई लोग खुलकर चर्चा करने में संकोच करते हैं। इसी कारण वे इंटरनेट पर मिलने वाले विज्ञापनों और उपचार संबंधी दावों पर भरोसा कर सकते हैं।साइबर अपराधी ऐसी परिस्थितियों का फायदा उठाकर लोगों से व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।कुछ मामलों में फर्जी चिकित्सकीय पहचान, नकली वेबसाइट और आकर्षक दावों का इस्तेमाल किया जाता है।इसलिए किसी भी ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा का उपयोग करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
फर्जी डॉक्टरों से इलाज कराना हो सकता है खतरनाक
इस मामले में आरोपियों पर आयुर्वेदिक डॉक्टर होने का झूठा दावा करने का आरोप है।चिकित्सा से संबंधित सेवाएं केवल उचित योग्यता और वैध पंजीकरण वाले स्वास्थ्य पेशेवरों से ही लेनी चाहिए।बिना जांच और उचित चिकित्सकीय सलाह के यौन क्षमता बढ़ाने के नाम पर बेची जाने वाली दवाओं या उत्पादों का सेवन स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।कई बार ऑनलाइन विज्ञापनों में ऐसे दावे किए जाते हैं जिनके समर्थन में विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण नहीं होते।इसलिए लोगों को किसी भी उपचार या दवा का इस्तेमाल करने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
ब्लैकमेलिंग का शिकार होने पर क्या करें?
यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन हनीट्रैप या ब्लैकमेलिंग का शिकार होता है, तो उसे डरकर आरोपियों को पैसे नहीं देने चाहिए।पीड़ित को संबंधित फोन नंबर, चैट, भुगतान विवरण और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने चाहिए।इसके बाद नजदीकी पुलिस थाने या साइबर अपराध से संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी जा सकती है।भारत में साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर दर्ज कराई जा सकती है।वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तत्काल संपर्क करना उपयोगी हो सकता है।
पुलिस जांच से सामने आ सकती हैं और जानकारियां
राजकोट ग्रामीण पुलिस द्वारा तीन कॉल सेंटरों का खुलासा किए जाने के बाद इस मामले में आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी।पुलिस के सामने गिरोह से जुड़े लोगों की पहचान, वेबसाइट के संचालन, ठगी की रकम और पीड़ितों से संबंधित जानकारी जुटाने जैसी चुनौतियां होंगी।इसके अलावा यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि आरोपियों ने लोगों तक पहुंचने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया।फिलहाल पुलिस की ओर से करीब 2000 लोगों को ठगे जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में आगे होने वाली कार्रवाई से गिरोह के नेटवर्क और ठगी के तरीकों को लेकर अधिक तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं।
ऑनलाइन इलाज के नाम पर ठगी से रहें सावधान
राजकोट में सामने आया यह मामला बताता है कि ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर भी लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया जा सकता है।किसी वेबसाइट पर डॉक्टर होने का दावा कर देना उसकी विश्वसनीयता का प्रमाण नहीं है।लोगों को अपनी निजी जानकारी, तस्वीरें और वित्तीय विवरण साझा करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
Tags: