गुजरात के मुख्यमंत्री ने 4.72 लाख से ज्यादा छात्रों को 646 करोड़ रुपए की स्कॉलरशिप बांटी
Gandhinagar गांधीनगर। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार को 4.72 लाख से ज्यादा छात्रों को स्कॉलरशिप और दूसरी शैक्षिक सहायता के तौर पर 646 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि बांटी। इस राशि का बड़ा हिस्सा उन लड़कियों को दिया गया, जिन्होंने 'नमो लक्ष्मी' योजना के तहत 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा पास की थी। गांधीनगर में स्वर्णिम संकुल में आयोजित एक कार्यक्रम में लाभार्थियों को सीधे वित्तीय सहायता डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए भेजी गई। सरकार ने बताया कि 4,72,260 से ज्यादा छात्रों को यह सहायता मिली।
'नमो लक्ष्मी' योजना के तहत, 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा पास करने वाली 4 लाख से ज्यादा लड़कियों को 513 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मिली। इसके अलावा, 'नमो सरस्वती विज्ञान साधना' योजना के तहत 12वीं कक्षा की साइंस-स्ट्रीम परीक्षा पास करने वाले 57,000 से ज्यादा छात्रों को 28 करोड़ रुपए बांटे गए। राज्य शिक्षा विभाग की स्कॉलरशिप से जुड़ी जानकारी में 'नमो लक्ष्मी' को लड़कियों की शिक्षा के लिए एक बड़ी वित्तीय सहायता योजना के तौर पर भी दर्ज किया गया है।
विभिन्न स्कॉलरशिप और उच्च-शिक्षा सहायता योजनाओं के तहत 105 करोड़ रुपए और बांटे गए। इसमें से 96 करोड़ रुपए 7,260 छात्रों को 'मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना', 'स्कीम ऑफ डेवलपिंग हाई क्वालिटी रिसर्च (शोध)', 'मुख्यमंत्री श्री स्कॉलरशिप योजना' और 'मुख्यमंत्री कन्या केलवणी निधि योजना' जैसी योजनाओं के तहत दिए गए। इसके अलावा, 48 संस्थानों को ग्रांट के तौर पर 9 करोड़ रुपए दिए गए। पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा के लिए एक मजबूत नींव रखी है और इस तरह गुजरात के विकास का आधार तैयार किया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने से प्रधानमंत्री के लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के विजन को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। 'नमो लक्ष्मी' और 'नमो सरस्वती' योजनाओं का जिक्र करते हुए पटेल ने कहा कि इनके अच्छे नतीजे मिले हैं, खासकर लड़कियों को साइंस की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने में। उन्होंने शिक्षा के बेहतर नतीजों के लिए शिक्षकों और समाज के बीच ज्यादा सहयोग की भी अपील की।
पटेल ने कहा कि समय के साथ बच्चों में जो बदलाव आए हैं और उनमें जिज्ञासा की भावना बढ़ी है, उसे देखते हुए शिक्षक समुदाय के लिए भी ज़्यादा तैयारी करना जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार तो शिक्षकों के साथ खड़ी रहेगी ही, लेकिन बेहतर नतीजे पाने के लिए समाज को भी उनके साथ 'कंधे से कंधा मिलाकर' खड़ा होना होगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने उन बच्चों की पहचान करने और उन्हें फिर से स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए एक अभियान भी शुरू किया है, जिन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी।
उन्होंने इस क्षेत्र में और तरक्की के लिए छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया।