1,143 करोड़ रुपये के कथित चंदा रैकेट में घिरी गुजरात की राजनीतिक पार्टी
अहमदाबाद: गुजरात पुलिस ने भारतीय नेशनल जनता दल (BNJD) और उसके चार पदाधिकारियों के खिलाफ़ 1,143.85 करोड़ रुपये और 56,238 दानदाताओं से जुड़े कथित फर्जी राजनीतिक चंदा रैकेट के मामले में आपराधिक केस दर्ज किया है। आयकर विभाग का अनुमान है कि इससे सरकारी खजाने को लगभग 343 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
यह FIR 25 सितंबर को गांधीनगर ज़ोन की CID क्राइम ब्रांच ने आयकर अधिकारियों की शिकायत के आधार पर दर्ज की थी।
इस मामले में पार्टी के अलावा BNJD के अध्यक्ष सुरेंद्रकुमार गजेरा, महासचिव विपुल सोलंकी, कोषाध्यक्ष रोनकसिंह चावड़ा और चार्टर्ड अकाउंटेंट-कम-ऑडिटर आदिल सैयद को भी आरोपी बनाया गया है।
इन आरोपों की पुष्टि अभी अदालत ने नहीं की है। आयकर विभाग की शिकायत के अनुसार, ये कथित लेन-देन वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2024-25 के बीच हुए थे।
आरोप है कि करदाताओं ने RTGS समेत बैंकिंग चैनलों के ज़रिए पार्टी को पैसे ट्रांसफर किए और उन्हें चंदे की रसीदें जारी की गईं, जिनकी मदद से वे आयकर अधिनियम के तहत राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे पर मिलने वाली छूट का दावा कर सके।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि इसके बाद ये फंड पार्टी के खातों से जे ट्रेडिंग, काजल एंटरप्राइजेज और परमार एसोसिएट्स जैसी मध्यस्थ फर्मों को ट्रांसफर किए गए।
इन ट्रांसफर का हिसाब दिखाने के लिए कथित तौर पर अनाज, दाल और अन्य सामान की खरीद के फर्जी बिल और इनवॉइस तैयार किए गए, जिसके बाद पैसे नकद निकाल लिए गए।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 2% से 10% तक कमीशन अपने पास रख लिया गया और बाकी पैसे अंगड़िया चैनलों और हवाला नेटवर्क के ज़रिए मूल दानदाताओं को वापस कर दिए गए।
आयकर विभाग का अनुमान है कि इस व्यवस्था के कारण प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) के रूप में लगभग 343 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि फर्जी अकाउंटिंग रिकॉर्ड और फॉर्म 24A में चंदे की रिपोर्ट तैयार करके चुनाव आयोग को सौंपी गईं, जिनमें इन कथित लेन-देन को असली राजनीतिक चंदा बताया गया था।
FIR में गजेरा को इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य आरोपी और सूत्रधार बताया गया है। जांच करने वालों का आरोप है कि वह इस नेटवर्क को संभालते थे और कमीशन की दरें तय करते थे।
सोलंकी पर आरोप है कि वह मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए दान देने वालों की जानकारी का तालमेल बिठाते थे और दान की हस्ताक्षरित रसीदें जारी करते थे।
खबरों के अनुसार, आयकर विभाग की तलाशी के दौरान चावड़ा से जुड़ी जगहों से लेन-देन के रिकॉर्ड और डिजिटल बातचीत के सबूत मिले हैं।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जांचकर्ताओं को बिचौलियों के साथ ऐसी बातचीत मिली है जिसमें कमीशन काटने के बाद अंगड़िया चैनलों के ज़रिए पैसे के लेन-देन की बात की गई थी। शिकायत पर आधारित एक और रिपोर्ट में कहा गया है कि तलाशी के दौरान कथित तौर पर लगभग 2.91 लाख रसीदें बरामद की गईं।
पार्टी के चार्टर्ड अकाउंटेंट और ऑडिटर सैयद की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
शिकायत में आरोप है कि उन्होंने पार्टी के खातों की ठीक से जांच किए बिना, और पार्टी के कार्यालय गए या असली लेन-देन की पड़ताल किए बिना ही ऑडिट रिपोर्ट तैयार कीं और उन पर डिजिटल हस्ताक्षर किए।
आयकर विभाग ने नवंबर 2025 में गांधीनगर में BNJD कार्यालय और उसके पदाधिकारियों से जुड़ी जगहों पर तलाशी ली थी।
पुलिस के अनुसार, इसके बाद हुई जांच ही इस आपराधिक शिकायत का आधार बनी।
यह मामला भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है।
BNJD एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है और इसने गुजरात में चुनाव लड़ा है। सार्वजनिक रिकॉर्ड से यह भी पता चलता है कि पार्टी ने पिछले वर्षों में अपनी फाइलिंग में भारी मात्रा में दान मिलने की जानकारी दी थी।