गुजरात: जूनागढ़ शहर में शनिवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक नन्हे शेर की जान वन विभाग की तत्परता से बच गई। शहर के ग्रोफेड इलाके में करीब 1 से 2 साल उम्र का एक शेर का शावक लोहे के गेट को पार करने की कोशिश कर रहा था, तभी उसका पिछला पैर गेट की नुकीली ग्रिल में बुरी तरह फंस गया। दर्द से तड़प रहे शावक को देखकर स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी, जिसके बाद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और सफलतापूर्वक उसे बचा लिया।
घटना की जानकारी मिलते ही जूनागढ़ वन विभाग और सक्करबाग प्राणी संग्रहालय की विशेषज्ञ टीम सक्रिय हो गई। टीम आधुनिक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची और काफी सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। शावक को ज्यादा नुकसान न पहुंचे, इसके लिए विशेषज्ञों ने बेहद सतर्कता बरतते हुए लोहे की ग्रिल को काटकर उसका पैर बाहर निकाला।
रेस्क्यू अभियान के दौरान टीम ने पूरी सावधानी बरती ताकि घायल शावक को किसी तरह की अतिरिक्त चोट न पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद शावक को सुरक्षित रूप से गेट से बाहर निकाला गया। इस दौरान वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सूझबूझ और तेजी की काफी सराहना की जा रही है।
रेस्क्यू के तुरंत बाद घायल शेर के बच्चे को इलाज के लिए जूनागढ़ स्थित प्रसिद्ध सक्करबाग प्राणी संग्रहालय ले जाया गया। वहां अनुभवी पशु चिकित्सकों की टीम ने उसका उपचार शुरू किया। डॉक्टरों के अनुसार, शावक के पैर में चोट आई है, लेकिन उसकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। अगले 24 घंटे तक उसे विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया है ताकि उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गिरनार और आसपास के जंगल क्षेत्रों में रहने वाले वन्यजीव कई बार भोजन और सुरक्षित रास्तों की तलाश में रिहायशी इलाकों के करीब पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों में वन विभाग की टीम तुरंत कार्रवाई करती है ताकि वन्यजीवों और इंसानों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस रेस्क्यू अभियान में गुजरात के वन एवं पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के मार्गदर्शन में विभाग ने तेजी से कार्रवाई की। उन्होंने वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
गुजरात का गिर क्षेत्र एशियाई शेरों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां बड़ी संख्या में शेरों का प्राकृतिक आवास है। जंगलों के आसपास बढ़ते मानवीय क्षेत्रों के कारण कई बार वन्यजीवों के सामने ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं, जहां उन्हें खतरा हो सकता है। ऐसे में वन विभाग और स्थानीय रेस्क्यू टीमों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
नन्हे शेर के सफल रेस्क्यू ने एक बार फिर साबित किया है कि समय पर की गई कार्रवाई किसी भी वन्यजीव की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। वन विभाग की इस त्वरित कार्रवाई और सक्करबाग प्राणी संग्रहालय की विशेषज्ञ टीम के प्रयासों की स्थानीय लोगों ने भी सराहना की है।
फिलहाल घायल शावक का इलाज जारी है और वन विभाग उसकी पूरी निगरानी कर रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि उचित उपचार और देखभाल के बाद वह जल्द स्वस्थ होकर अपने प्राकृतिक वातावरण में लौट सकेगा। यह घटना वन्यजीव संरक्षण के प्रति गुजरात सरकार और वन विभाग की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।