अहमदाबाद। देश में हवाई संपर्क को और मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा है कि क्षेत्रीय संपर्क योजना ‘उड़ान’ (UDAN) के तहत अगले 10 वर्षों में देशभर में 100 नए एयरपोर्ट विकसित किए जाएंगे। इन एयरपोर्ट के निर्माण और विकास पर करीब 30,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना है। सरकार का उद्देश्य छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना और आम लोगों के लिए हवाई यात्रा को अधिक सुलभ बनाना है।

नागरिक उड्डयन मंत्री ने मंगलवार को अहमदाबाद एयरपोर्ट से भारत के तीसरे ‘हब एंड स्पोक’ ऑपरेशन का उद्घाटन करते हुए देश में तेजी से बढ़ रहे विमानन बुनियादी ढांचे का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में भारत में 74 एयरपोर्ट थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 166 हो गई है। उन्होंने इसे देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

नायडू ने कहा कि 74 एयरपोर्ट से 166 तक पहुंचना देश के लिए एक रिकॉर्ड है। सरकार अब इस नेटवर्क को और विस्तार देने की तैयारी कर रही है। अगले एक दशक में 100 नए एयरपोर्ट बनने के बाद देश के कई ऐसे शहर भी हवाई नेटवर्क से जुड़ सकेंगे जहां अभी नियमित विमान सेवा उपलब्ध नहीं है या सीमित है।

30 हजार करोड़ रुपये होंगे खर्च

सरकार की योजना के मुताबिक नए एयरपोर्ट विकसित करने के लिए लगभग 30,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस निवेश का बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय हवाई संपर्क मजबूत करने और जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने में लगाया जाएगा।

नए एयरपोर्ट बनने से केवल यात्रियों को ही सुविधा नहीं मिलेगी बल्कि संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा एयरपोर्ट के आसपास होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

सरकार का फोकस ऐसे क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने पर है जहां सड़क या रेल मार्ग से यात्रा में अधिक समय लगता है। हवाई सेवा शुरू होने से इन क्षेत्रों के लोगों को बड़े शहरों तक पहुंचने का तेज विकल्प उपलब्ध होगा।

2014 में थे 74 एयरपोर्ट

नागरिक उड्डयन मंत्री ने देश में पिछले वर्षों के दौरान एयरपोर्ट नेटवर्क के विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 में भारत में 74 एयरपोर्ट थे। अब यह संख्या बढ़कर 166 हो गई है।

सरकार इसे क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही है। पिछले वर्षों में कई पुराने एयरपोर्ट को दोबारा सक्रिय करने के साथ नए एयरपोर्ट और टर्मिनल भी विकसित किए गए हैं।

अब अगले चरण में 100 नए एयरपोर्ट बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यदि योजना निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ती है तो देश के नागरिक उड्डयन नेटवर्क में बड़ा विस्तार देखने को मिलेगा।

छोटे शहरों पर उड़ान योजना का फोकस

‘उड़ान’ यानी ‘उड़े देश का आम नागरिक’ योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे और मध्यम शहरों को हवाई सेवा से जोड़ना है। योजना के तहत ऐसे हवाई मार्गों को प्रोत्साहित किया जाता है जहां व्यावसायिक कारणों से नियमित उड़ानें शुरू करना विमानन कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

क्षेत्रीय संपर्क बढ़ने से छोटे शहरों के यात्रियों को हवाई यात्रा के लिए बड़े महानगरों तक लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम हो सकती है। नजदीकी एयरपोर्ट से उड़ान मिलने पर यात्रा का समय भी कम होगा।

नए एयरपोर्ट विकसित होने से देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में विमानन बाजार के विस्तार की भी संभावना है। बढ़ती आय, कारोबार और पर्यटन के कारण इन शहरों से हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही है।

अहमदाबाद से तीसरा हब एंड स्पोक ऑपरेशन

नायडू ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से देश के तीसरे ‘हब एंड स्पोक’ ऑपरेशन का उद्घाटन भी किया। हब एंड स्पोक मॉडल में एक प्रमुख एयरपोर्ट को केंद्रीय हब बनाया जाता है और उससे छोटे शहरों तथा अन्य गंतव्यों को उड़ानों के जरिए जोड़ा जाता है।

इस मॉडल का फायदा यह है कि छोटे शहरों से आने वाले यात्री एक प्रमुख एयरपोर्ट के माध्यम से कई दूसरे शहरों तक आसानी से यात्रा कर सकते हैं। इससे हर छोटे शहर के बीच सीधी उड़ान शुरू करने की आवश्यकता कम हो जाती है।

अहमदाबाद जैसे बड़े विमानन केंद्र से क्षेत्रीय शहरों को जोड़ने पर यात्रियों को ज्यादा कनेक्टिंग विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं। इससे एयरलाइंस भी अपने विमानों और नेटवर्क का बेहतर इस्तेमाल कर सकती हैं।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मिलेगी मजबूती

100 नए एयरपोर्ट बनाने की योजना को देश में क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने की व्यापक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत में ऐसे कई जिले और शहर हैं जहां से निकटतम एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए यात्रियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

नए एयरपोर्ट बनने के बाद इस दूरी को कम करने में मदद मिलेगी। खासकर पर्यटन स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों के लिए बेहतर हवाई संपर्क महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

किसी क्षेत्र में एयरपोर्ट शुरू होने का असर केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं रहता। इससे स्थानीय व्यापारियों को बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचने में मदद मिलती है। समय के प्रति संवेदनशील वस्तुओं और कार्गो परिवहन के लिए भी हवाई नेटवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे

एयरपोर्ट निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। एयरपोर्ट पर सुरक्षा, ग्राउंड हैंडलिंग, तकनीकी सेवाओं, टिकटिंग और अन्य संचालन के लिए कर्मचारियों की जरूरत होती है।

इसके अलावा एयरपोर्ट के आसपास टैक्सी, होटल, रेस्टोरेंट, लॉजिस्टिक्स और खुदरा कारोबार जैसी गतिविधियां भी विकसित हो सकती हैं। इस तरह विमानन बुनियादी ढांचे में किया गया निवेश स्थानीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

तेजी से बढ़ रहा भारतीय विमानन बाजार

भारत का घरेलू विमानन क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। बड़े महानगरों के साथ छोटे शहरों से भी हवाई यात्रा की मांग बढ़ रही है। एयरलाइंस अपने बेड़े और रूट नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं। ऐसे में एयरपोर्ट क्षमता बढ़ाना भी जरूरी हो गया है।

बड़े एयरपोर्ट पर यात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण नए टर्मिनल और रनवे विकसित किए जा रहे हैं। दूसरी ओर छोटे शहरों में नए एयरपोर्ट तैयार कर यात्रियों का दबाव अलग-अलग क्षेत्रों में बांटने की कोशिश की जा रही है।

अगले दशक में बदलेगा एयरपोर्ट नेटवर्क

सरकार का अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट बनाने का लक्ष्य पूरा होता है तो देश का विमानन नक्शा काफी बदल सकता है। खासकर ऐसे क्षेत्र जहां अभी हवाई संपर्क सीमित है, वे राष्ट्रीय विमानन नेटवर्क का हिस्सा बन सकेंगे।

करीब 30,000 करोड़ रुपये की प्रस्तावित लागत वाली इस योजना में एयरपोर्ट निर्माण के साथ आवश्यक विमानन सुविधाओं का विकास भी महत्वपूर्ण होगा। नए एयरपोर्ट की लोकेशन, यात्रियों की संभावित संख्या और क्षेत्रीय जरूरतों के आधार पर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है।

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू के मुताबिक देश 2014 के 74 एयरपोर्ट से बढ़कर अब 166 एयरपोर्ट तक पहुंच चुका है। अब सरकार का अगला लक्ष्य 100 और एयरपोर्ट जोड़कर भारत के हवाई नेटवर्क को गांवों, छोटे शहरों और क्षेत्रीय केंद्रों के और करीब पहुंचाना है।

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