पणजी: GPCC के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील कवतंकर ने पणजी के आजाद मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए कथित हिंदू-विरोधी नारों की निंदा की है। उन्होंने DGP से इस मामले की गहन जांच कराने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की मांग की है।
गुरुवार को प्रेस को संबोधित करते हुए कवतंकर ने कहा कि कांग्रेस ने कुछ ऐसे वीडियो देखे हैं, जिनमें कुछ लोग कथित तौर पर हिंदुत्व के खिलाफ नारे लगाते दिख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विरोध प्रदर्शन का मकसद SIR प्रक्रिया का विरोध करना और चुनावी निष्पक्षता को लेकर चिंता जताना था, न कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना। उन्होंने कहा, "हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। यह विरोध प्रदर्शन SIR मुद्दे, ज्ञानेश कुमार के फैसलों और भारतीय लोकतंत्र व चुनावों के साथ हो रही छेड़छाड़ के खिलाफ था। इसका मकसद कभी भी गोवा में किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना नहीं था।"
सेंट फ्रांसिस जेवियर के बारे में गौतम खट्टर की कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कवतंकर ने कहा कि दोनों मामलों में जवाबदेही के एक जैसे मानक लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा, "जब सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की बात आती है, तो गोवा में 'जीरो-टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने की) नीति अपनाई जानी चाहिए, चाहे मामला मुसलमानों, ईसाइयों या हिंदुओं से जुड़ा हो।"
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि जब भी BJP पर राजनीतिक दबाव होता है, तो ऐसी सांप्रदायिक घटनाएं सामने आने लगती हैं। उन्होंने 'गोवा रक्षण यात्रा' और चुनाव से जुड़े विवादों का उदाहरण दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन नारों का समय राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकता है, जिसका मकसद राज्य सरकार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से लोगों का ध्यान भटकाना हो सकता है।
कवतंकर ने प्रशासन से अपील की कि वे सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश करने वालों की पहचान करें और पता लगाएं कि क्या यह घटना राजनीतिक रूप से प्रायोजित थी।
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