Goa गोवा: गोवा के चर्चित 2006 मंदार सुरलकर हत्याकांड में सजा काट रहे चौथे दोषी नफियाज शेख ने समय से पहले रिहाई की मांग को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया है। शेख ने अदालत में याचिका दायर कर अपने सह-दोषियों को मिली राहत के आधार पर उसे भी समय से पहले जेल से रिहा किए जाने की मांग की है। उसकी याचिका ऐसे समय में सामने आई है, जब हाई कोर्ट ने इसी मामले में सजा काट रहे तीन अन्य दोषियों को पहले ही समय से पहले रिहाई का आदेश दिया है।
जानकारी के अनुसार, हाई कोर्ट ने 6 अगस्त को मंदार सुरलकर हत्याकांड में दोषी ठहराए गए रोहन धुंगट, रयान पिंटो और शंकर तिवारी को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया था। अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले में सजा काट रहे चौथे दोषी नफियाज शेख ने भी इसी तरह की राहत के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
नफियाज शेख की ओर से दायर याचिका में मुख्य आधार यह बताया गया है कि उसी मामले में उसके साथ सजा काट रहे तीन अन्य दोषियों को हाई कोर्ट से समय से पहले रिहाई की अनुमति मिल चुकी है। ऐसे में शेख ने भी समान परिस्थितियों के आधार पर अपने मामले पर विचार करने और उसे भी निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले रिहा करने की मांग की है।
मंदार सुरलकर हत्याकांड वर्ष 2006 का मामला है और इसने उस समय काफी चर्चा बटोरी थी। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी और बाद में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान संबंधित आरोपियों को दोषी ठहराया गया। इसके बाद दोषियों को अदालत द्वारा निर्धारित सजा भुगतने के लिए जेल भेजा गया। वर्षों बाद अब इस मामले में दोषियों की समय से पहले रिहाई का मुद्दा अदालत के सामने आया है।
6 अगस्त को तीन दोषियों को राहत मिलने के बाद मामले ने एक बार फिर कानूनी रूप से ध्यान आकर्षित किया है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद नफियाज शेख ने भी अपने मामले में समान आधार पर राहत पाने की कोशिश की है। उसकी याचिका पर अदालत अब संबंधित कानूनी प्रावधानों, जेल में बिताई गई अवधि, उसके आचरण और मामले की अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विचार कर सकती है।
समय से पहले रिहाई से संबंधित मामलों में अदालत आमतौर पर लागू नियमों और संबंधित कैदी की परिस्थितियों को ध्यान में रखती है। इसमें सजा की प्रकृति, जेल में बिताया गया समय, जेल के दौरान व्यवहार और सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से रखे गए रिकॉर्ड जैसे पहलुओं का महत्व हो सकता है। हालांकि, नफियाज शेख की याचिका पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही लिया जाएगा।
इस मामले में तीन सह-दोषियों को पहले ही राहत मिलने के कारण शेख की याचिका पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। याचिका में यह तर्क दिया जा सकता है कि समान मामले और समान परिस्थितियों में सजा काट रहे दोषियों के साथ एक समान व्यवहार किया जाना चाहिए। हालांकि, अदालत प्रत्येक दोषी की व्यक्तिगत परिस्थितियों और उपलब्ध रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से समीक्षा कर सकती है।
अब सभी की नजर हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर है। अदालत याचिका पर सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों की दलीलें सुन सकती है और लागू नियमों के तहत नफियाज शेख को समय से पहले रिहाई देने या याचिका पर आगे कार्रवाई करने को लेकर फैसला कर सकती है।
फिलहाल नफियाज शेख जेल में सजा काट रहा है और उसकी ओर से दाखिल याचिका अदालत के विचाराधीन है। 2006 के मंदार सुरलकर हत्याकांड से जुड़े इस घटनाक्रम ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। तीन सह-दोषियों को मिल चुकी राहत के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हाई कोर्ट नफियाज शेख की याचिका पर क्या रुख अपनाता है और क्या उसे भी समान आधार पर समय से पहले रिहाई का लाभ मिलता है।