छग के जंगल में करंट, ज़हर व फंदे से मारे जा रहे वन्यप्राणी

Update: 2022-02-09 05:52 GMT
  1. शिकारी और तस्करों के जंगल में अनाधिकृत हस्तक्षेप बना वन्य जीवों के मौत का फरमान
  2. वन्य जीवों की शरणस्थली न होकर जंगल बन चुका है कब्रगाह
  3. छत्तीसगढ़ में चल रहा है जंगलराज,वन विभाग बेखबर
  4. विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के दायरे में, भ्रष्ट वन कर्मी और अधिकारी ने सौंप दिया जंगल तस्करों को
  5. अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे - वन्य प्राणी के शिकार को वन विभाग के अफसर छिपाने का प्रयास कर रहे हैं। इस क्षेत्र में पदस्थ वन कर्मचारी व अफसर यहां नहीं रहते, जिसके चलते जंगल और वन्य प्राणियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। सोंठी सर्किल से लगा हुआ सीपत सर्किल है। यहां पदस्थ डिप्टी रेंजर अयज बेन से तेंदुए की लाश मिलने की जानकारी ली गई, तब उन्होंने अपने क्षेत्र में इस तरह की घटना से ही इनकार कर दिया। हैरानी की बात है कि सोंठी सर्किल के जंगल में तेंदुए की लाश मिली है और उससे लगे सीपत सर्किल के डिप्टी रेंजर से अफसरों ने जानकारी साझा नहीं की है। वन्य प्राणियों की सुरक्षा के साथ अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

जसेरि रिपोर्टर

रायपुर। प्रदेश के जंगल में अवैध शिकार दिनों बढ़ते जा रहा है। औसतन हर दिन वन्य प्राणी का शिकार हो रहा है। कभी करंट लगाकर तो कभी ज़हर देकर, तो कभी फंदे का प्रयोग कर अवैध शिकार किया जा रहा है। वन अधिकारी और कर्मचारियों का खौफ वन तस्करों में नहीं रहा है। कहीं अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत तो नहीं? अवैध शिकार की आग ऐसी लगी है कि वन्यप्राणियों को जान बचाने का भी मौका नहीं मिल रहा है। विभागीय अधिकारी अवैध शिकार कैसे रोकें। इस पर कागजी कार्ययोजनाएं तो सैकड़ों बने पर पर अमल एक पर भी नहीं हुआ जिसकी परिणति सामने है। लेकिन पिछले 8 से 10 सालों में वन्य प्राणियों का जीवन सुरक्षित नहीं हो सका। लगातार शिकारी और तस्करों के जंगल में अवैध प्रवेश वन्यजीवों के मौत का फरमान बन चुका है। वन ग्रामों में इंसानी बसाहट भी काफी हद तक इसका जिम्मेदार है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में एक दो वन ग्रामों को अन्यत्र बसाया गया था लेकिन अब ठन्डे बस्ते में है। पिछले साल सिहावा पुलिस ने सिहावा क्षेत्र में एक बाघ की खाल के साथ एक युवक को पकड़ा था, युवक आमाबेड़ा जिला कांकेर का निवासी था जाहिर ये होता है कि बाघ केशकाल वनमंडल का था अब सवाल ये उठता है कि केशकाल वनमंडल के बाघ का शिकार कर युवक बेचने के लये सिहावा नगरी की ओर कूच किया। इसी प्रकार सहसपुर लोहरा वन प्रक्षेत्र भठेला टोला परिसर के कक्ष क्रमांक 305 में पिछले साल फऱवरी को एक मादा तेंदुआ का शव मिला था जिसे करंट लगाकर मारा गया था। उसके भी चरों पंजे काट कर तस्कर ले गए थे। इसके आलावा रोजाना वन्यप्राणियो का शिकार किया जा रहा है। वैसे भी वन विभाग के सूत्र बताते हैं कि अफसरशाही अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। शिकारियों को बरसों से अड्डे मालूम लेकिन अधिकारियों को भनक नहीं कल बिलासपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत सोठी सर्किल के बिटकुला बीट में शिकारियों ने एक नर तेंदुआ को मौत के गाट उतार दिया जिसकी जानकारी जंगर व वन्य पराणियों को रखवालों को सूचना दो दिन बाद मिली। वन्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी बंद कमरे में बैठकर योजना बनाने में लगे हैं। वन्यप्राणियों के प्रतिबंधित अंग असली और नकली दोनों आसानी से उपलब्ध बाज़ार में बिक रहे। ऐसा महसूस हो रहा है कि बंदरबांट सिस्टम का एक हिस्सा हो गया है। इसके अलावा कई जंगली जीवों का शिकार रोजाना हो रहा है। वन अधिकारी सिर्फ कार्य योजना बनाने में मस्त हैं। जंगल में करंट लगाया जा रहा है और वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लग रही है। जंगल विभाग की कारगुजारी से ऐसा लग रहा है मानो छत्तीसगढ़ में जंगलराज चल रहा है।अवैध शिकार दिनों दिन बढ़ते ही जा रहा है। अमूमन हर रोज वन्य प्राणियों का शिकार हो रहा है जंगल वन्य जीवों की शरण स्थली न होकर कब्रगाह बन चुका है। लगातार शिकारियों का हौसला बढ़ते जा रहा है । प्रदेश में पिछले एक साल में काफी तादात में वन्यजीवों का शिकार हुआ है, जिसमें तेंदुआ, पेंगोलिन, चीतल, सांभर, भालू, हाथी आदि वन्यजीव शामिल हैं। ऐसा लगता है कि वन्यप्राणियों के अकाल मौत के प्रति विभाग गंभीर नहीं है। अधिकारी मैदानी इलाके में जाने से बच रहे हैं नतीजन वन्यप्राणी अकाल काल के गाल में समा रहे हैं अधिकारी अपने कार्य में गंभीर लापरवाही बरत रहे हैं तभी तो रोजाना वन्यप्राणियों को मारा जा रहा है। जब कभी इस बारे में चर्चा की जाती है तो अधिकारियों का रटारटाया जवाब मिलता है कि विभाग अपना काम कर रहा है। वन्यप्राणियों के अवैध शिकार पर वनमंत्री को संज्ञान लेकर तत्काल इस पर करवाई करना होगा तब जाकर अवैध शिकार पर लगाम लगाया जा सकता है। साथ ही वन्य ग्रामों की अन्यत्र बसाहट पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। वर्ना वन्यप्राणी शिकारियों के हाथों ऐसे ही मारे जाते रहेंगे। विभाग चालान पेश करने में भी हीलाहवाला करते हैं। अपराधियों द्वारा वन्यजीवों के शिकार या फिर तस्करी की घटना को अंजाम देने के बाद वन विभाग अपराध दर्ज कर उसे भूल जाता है।

तेंदुए की खाल बरामद, वन विभाग

में मचा हडकंप

छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणियों के शिकार और तस्करी का मामला लगातार फूट रहा है। धमतरी जिले में तेंदुए की खाल बरामद होने के दूसरे दिन अब बिलासपुर जिले में तेंदुए का दो दिन पुराना शव मिला है। सीपत क्षेत्र से लगे बिटकुला-खम्हिरया वन परिक्षेत्र में तेंदुए का शव मिलने से वन विभाग में हडकंप मच गया। तेंदुए का पैर कटा हुआ है और दांत गायब है, जिससे शिकार की आशंका है। इस घटना के सामने आने के बाद वन विभाग के अफसरों ने चुप्पी साध ली है। वन अफसर मीडिया से बात करने से कतरा रहे हैं।

वन्य जीवों के तस्कर और शिकारी बेखौफ

बताया जाता है कि बिटकुला-खम्हिरया वन परिक्षेत्र में तेंदुए की मौत की जानकारी वन विभाग को नहीं थी। ग्रामीणों ने स्थानीय वनकर्मियों को सूचना दी, तब यह मामला सामने आया। तेंदुए के पैरों यानी पंजे का हिस्सा गायब है। उसके दांत को भी निकाल लिए गए हैं। तेंदुए का जिस बेरहमी से शिकार किया गया है। इससे उसके अंगों की तस्करी की आंशका जताई जा रही है। शिकारियों ने तेंदुए को मारने के बाद उसके चारों पैर को काट ले गए हैं। इसी तरह सहसपुर लोहारा परिक्षेत्र के अंतर्गत साल्हेबाटा बीट में बी मादा तेंदुए को मारकर चारों पंजे और मूंछ काट कर शिकारी ले गए ते, इससे जाहिर होता है कि शिकारियों के दिल में वन अधिकारियों का खौफ नहीं है जिससे वे वन्य जीवों का बेखौफ शिकार कर रहे है।

नर तेंदुआ का पंजे काटकर ले गए शिकारी

बिलासपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत सोठी सर्किल के बिटकुला बीट में शिकारियों ने एक नर तेंदुआ को मौत के घाट उतार दिया है। शिकार के साथ नाखून निकालने के लिए चारों पंजों को ही काटकर ले गए। दांत व पूंछ भी गायब हैं। जंगल के अंदर इतनी बड़ी घटना हो गई पर रखवालों को इसकी भनक तक नहीं लगी। दो दिन बाद सोमवार को जब किसी ग्रामीण ने इसकी सूचना दी तो विभाग में हडकंप मच गया। पुलिस कई तस्करों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन वन्य जीवों की हत्या आज भी जारी है. हाल ही में पुलिस ने तेंदुए की खाल के साथ शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है. पुलिस फिलहाल मामले में पूछताछ कर रही है. कई खुलासे हो सकते हैं. दरअसल, पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है. तेंदुए खाल की तस्करी करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. तीनों शातिर तस्कर तेंदुए की खाल को बोरी में भरकर बिक्री करने के लिए ग्राहक तलाश रहे थे. शातिर तस्करों को ग्राहक तो नहीं मिले, लेकिन पुलिस से मुलाकात जरूर हो गई. मिली जानकारी के मुताबिक नगरी पुलिस की संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर साइबर सेल की मदद से तीनों को धर दबोचा है. तकरीबन 13.83 लाख रुपये कीमती वन्य प्राणी तेंदुए की खाल के साथ 2 बाइक और मोबाइल जब्त किया है. आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत की गई है।

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