CG: जंगली सुअर का हमला, महिला गंभीर रूप से घायल

छग

Update: 2025-12-03 19:03 GMT
Durg. दुर्ग। दुर्ग जिले के भिलाई में मंगलवार शाम एक खौफनाक घटना सामने आई, जब सेक्टर-1, सड़क नंबर 10 पर एक जंगली सुअर ने घर लौट रहीं राजकुमारी देवांगन पर अचानक हमला कर दिया। हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनके हाथ में गहरे घाव आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में कई दिनों से जंगली सुअरों की गतिविधि देखी जा रही है, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राजकुमारी देवांगन रोज की तरह घर की ओर लौट रही थीं। जैसे ही वे
झाड़ियों
के पास पहुंचीं, अचानक भीतर से एक जंगली सुअर निकला और फुर्ति से उन पर टूट पड़ा। हमले के दौरान महिला जमीन पर गिर गईं और बुरी तरह घायल हो गईं। उनकी चीख पुकार सुनकर आस-पास के लोग तुरंत बाहर निकले। उन्होंने शोर मचाते हुए सुअर को वहां से भगाया और घायल महिला को उठाकर तत्काल अस्पताल पहुंचाया।

राजकुमारी देवांगन को सुपेला के अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन घाव गहरे होने और अधिक खून बहने के कारण डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति देखते हुए उन्हें रायपुर रेफर कर दिया। वर्तमान में उनका इलाज जारी है और डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में वन विभाग के प्रति नाराजगी साफ नजर आई। लोगों का कहना है कि सेक्टर-1 इलाके में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार जंगली सुअरों की आवाजाही देखी जा रही है, लेकिन शिकायतों के बावजूद विभाग की ओर से क्षेत्र में न तो गश्त बढ़ाई गई और न ही झाड़ियों की सफाई जैसे जरूरी कदम उठाए गए। स्थानीय निवासियों ने कहा कि यदि वन विभाग पहले से सतर्कता बरतता तो शायद इस हादसे को रोका जा सकता था।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि आवासीय क्षेत्रों में जंगली सुअर और अन्य वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी को नियंत्रित करने के लिए त्वरित और ठोस कार्रवाई की जाए। साथ ही झाड़ियों की सफाई और इलाके में रात के समय गश्त को अनिवार्य किए जाने की भी मांग उठाई गई है। दुर्ग के डीएफओ दीपेश कपिल ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया है और स्थिति का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग शहरी इलाकों में जंगली जानवरों के प्रवेश को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। यह घटना एक बार फिर मानव–वन्यजीव संघर्ष की समस्या को उजागर करती है और इस ओर ध्यान दिलाती है कि शहरी विस्तार और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों में निरंतर कमी से ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। यदि समय पर रोकथाम नहीं की गई तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं सामने आने की आशंका है।
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