Mahasamund. महासमुंद। जिले में अन्न (मिलेट्स) के उत्पादन एवं उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों एवं आमजन को इसके पोषण एवं आर्थिक महत्व से अवगत कराने के उद्देश्य से "स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि के लिए अन्न (मिलेट्स) एक वरदान हैं" विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सह संवादात्मक सत्र का आयोजन रविवार को जिला पंचायत महासमुंद के सभाकक्ष में किया गया। कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड, जिला प्रशासन तथा कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यशाला में देश के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एवं मिलेट्स मैन ऑफ इंडिया पद्म डॉ. खादर वली मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अन्न भविष्य की खेती और स्वस्थ भारत की मजबूत नींव है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियों, घटते जल संसाधनों तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच मिलेट्स सबसे उपयुक्त फसल के रूप में उभरकर सामने आया है।
डॉ. खादर वली ने बताया कि कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा सहित सभी प्रकार के अन्न में भरपूर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, जिंक, मैग्नीशियम तथा अनेक सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं। नियमित रूप से इनके सेवन से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग तथा पाचन संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करने में सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि अन्न शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ बच्चों, महिलाओं एवं बुजुर्गों के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। डॉ खादर वली ने बताया कि वो कर्नाटक मैसूर से है।और पिछले 30 साल से इस पर काम कर रहे है। उन्होंने कहा कि तीन महीने कोदो कुटकी ,रागी खाइये तीन महीने में बीमारी खत्म।।
पारंपरिक अनाज को फिर से अपने रसोई घर में स्वागत करें। देश के सभी नागरिकों को बीमारी से दूर रखना हमारा ध्येय है। उन्होंने कहा कि इस अनाज से कोई बीमारी नहीं आएगी। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि मिलेट्स की खेती कम पानी, कम लागत और कम संसाधनों में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। यह फसल सूखा एवं प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है। इससे न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर होने वाला खर्च भी कम होता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है।
उन्होंने कहा कि आज विश्वभर में अन्न की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसान केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से अधिक लाभ अर्जित करें। उन्होंने किसानों को मिलेट्स आधारित खाद्य उत्पाद तैयार करने, स्थानीय स्तर पर उद्यम स्थापित करने तथा बाजार की बढ़ती मांग का लाभ उठाने की सलाह दी। डॉ. खादर वली ने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने दैनिक भोजन में अन्न को शामिल करे तो कुपोषण, एनीमिया एवं जीवनशैली से जुड़ी अनेक बीमारियों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने इसे "भोजन ही औषधि" की भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए स्वस्थ समाज के निर्माण में अन्न की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार चंद्रवंशी ने किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि राज्य सरकार मिलेट्स की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने कहा कि किसानो को बीज उपलब्ध कराया जाएगा और उत्पादन को खरीदा जाएगा। इस कार्यशाला में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपमा आनंद, कृषि उप संचालक एफ.आर. कश्यप, जिला स्काउट गाइड संघ के अध्यक्ष येतराम साहू, जनपद सदस्य विजयलक्ष्मी जांगड़े, सांसद प्रतिनिधि महेंद्र जैन, उन्नत कृषक महेंद्र चंद्राकर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। संवादात्मक सत्र में किसानों ने अन्न की खेती, प्राकृतिक कृषि, बीज चयन, जल संरक्षण, प्रसंस्करण, विपणन तथा मूल्य संवर्धन से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. खादर वली ने विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए किसानों को अन्न आधारित टिकाऊ कृषि प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए तथा जिले में मिलेट्स के रकबे एवं उपभोग को बढ़ाने का संकल्प लिया। भंवरपुर के किसान संत राम पटेल ने बताया कि वो रागी की खेती कर रहे है और लगभग 1000 क्विंटल रागी उत्पादन किए हैं।इस तरह किसान महेंद्र चंद्राकर ने भी अपने अनुभव साझा किया। इस अवसर पर कोदो की खिचड़ी और रागी का खीर भी परोसा गया।