बीजापुर में खराब पड़े वाटर कूलर, भीषण गर्मी में जनता को नहीं मिल रहा ठंडा पानी
छग
Bijapur. बीजापुर। जिले के मुख्यालय में आम जनता की सुविधा के लिए लगाए गए वाटर कूलर इन दिनों बदहाल स्थिति में पड़े हैं। गर्मी लगातार बढ़ रही है, लेकिन शहर के प्रमुख स्थानों पर लगाए गए कूलर लंबे समय से खराब पड़े होने के कारण लोगों को पीने के ठंडे पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जानकारी के अनुसार, बीजापुर शहर के मुख्य मार्गों, नए बस स्टैंड, सी-मार्ट, इंदिरा मार्केट और कलेक्टर कार्यालय जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए करीब पांच वाटर कूलर लगाए गए थे। इनका उद्देश्य राहगीरों और यात्रियों को गर्मी के मौसम में राहत देना था, लेकिन मेंटेनेंस के अभाव में ये सभी कूलर बंद पड़े हैं और धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मार्च का महीना समाप्त होने को है और तापमान लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में वाटर कूलर का बंद होना नगर पालिका की लापरवाही को उजागर करता है। लोगों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते इनकी मरम्मत कर ली जाती, तो जनता को राहत मिल सकती थी। अब हालात यह हैं कि लोग दूर-दराज से आने के बाद भी पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं। नगर पालिका परिषद के जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि परिषद की बैठकों में कई बार वाटर कूलर के खराब होने का मामला उठाया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
इससे साफ है कि समस्या को लेकर प्रशासनिक स्तर पर उदासीनता बरती जा रही है। इस मामले में नगर पालिका बीजापुर के सीएमओ बंशीलाल नुरेटी ने बताया कि वाटर कूलरों के कुछ आवश्यक पार्ट्स उपलब्ध नहीं थे, जिन्हें मंगाया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही सभी कूलरों को ठीक कर दिया जाएगा और जनता को सुविधा मिल सकेगी। हालांकि, लगातार मिल रहे आश्वासनों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकारी धन से लगाए गए इन वाटर कूलरों की अनदेखी संसाधनों की बर्बादी नहीं है? गर्मी के इस मौसम में जब पानी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, तब इस तरह की लापरवाही आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इन खराब कूलरों को दुरुस्त कर पाता है और लोगों को राहत मिलती है।