Surguja. सरगुजा। केंद्रीय जेल परिसर में जिला बदर आरोपी के मोबाइल फोन पर बातचीत का वीडियो वायरल होने के बाद सरगुजा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने घटना को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तीन पुलिस आरक्षकों को निलंबित कर दिया है। निलंबित जवान सभी थाना अंबिकापुर में पदस्थ थे। जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर थाना के अपराध क्रमांक 781/2025 के तहत दर्ज प्रकरण में आरोपी जय आदित्य तिवारी उर्फ अंश पंडित को 23 अक्टूबर 2025 को जीवन ज्योति अस्पताल, अंबिकापुर से इलाज के बाद डिस्चार्ज कर गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के पश्चात जब आरोपी को न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया चल रही थी, तब उसकी सुरक्षा ड्यूटी पर तीन आरक्षकों आरक्षक क्रमांक 773 परवेज फिरदौसी, आरक्षक 378 डॉ. सिम सिद्दार और आरक्षक 480 सुशील खेस को लगाया गया था।
इसी दौरान आरोपी अंश पंडित का मोबाइल फोन पर बातचीत करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। वीडियो में आरोपी जेल परिसर के बाहर किसी से फोन पर बात करता स्पष्ट दिखाई दे रहा है। वायरल वीडियो ने न केवल पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए बल्कि विभागीय अनुशासन को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि ड्यूटी पर तैनात तीनों आरक्षक न तो आरोपी को मोबाइल से बात करने से रोक पाए, न ही फोन जब्त किया। इस लापरवाही को वरिष्ठ अधिकारियों ने गंभीर अपराध मानते हुए प्रथम दृष्टया दोषी पाया। पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने तत्काल प्रभाव से तीनों आरक्षकों को निलंबित कर रक्षित केंद्र अंबिकापुर में सम्बद्ध कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार गुजारा भत्ता (Subsistence Allowance) प्रदान किया जाएगा।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बातचीत में आरोपी ने किससे संपर्क किया और क्या कोई बाहरी सहयोग शामिल था। वहीं, जेल प्रशासन से भी रिपोर्ट तलब की गई है कि आरोपी मोबाइल फोन तक कैसे पहुंच पाया। यह मामला सामने आने के बाद विभाग ने जेल परिसर और पुलिस हिरासत से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अब यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो। एसपी राजेश अग्रवाल ने कहा है कि “जिम्मेदारी के पद पर रहते हुए अनुशासनहीनता या संदिग्ध आचरण किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस बल की साख बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”