चारामा पुलिस की खुलेआम गुण्डागर्दी का वीडियो हो रहा वायरल
गुप्तांग में किया वार, दर्द से कराहते जमीन पर गिरा चालक
Charama. चारामा। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के चारामा थाना क्षेत्र से पुलिस की एक शर्मनाक और अमानवीय करतूत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और उसके आचरण को भी कठघरे में खड़ा करती है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद चौतरफा आलोचना हो रही है, जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे चारामा थाना प्रभारी जितेन्द्र साहू, बिना वर्दी के कुछ पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर एक ट्रेलर वाहन चालक को बीच सड़क पर घसीटते, पीटते और अपमानित करते नजर आ रहे हैं। जनता से रिश्ता इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है कि पुलिस युवक को मार रही है या बचा रही है खुद वीडियो देखें और समझें।
वीडियो में दिखी खुलेआम गुंडागर्दी
घटना नेशनल हाईवे-30 पर घटी, जो कि क्षेत्र की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक पीली टी-शर्ट पहने व्यक्ति ट्रेलर चालक को उसकी सीट से जबरदस्ती खींच रहा है और फिर उसे नीचे उतारकर सड़क पर पटक देता है। यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि चारामा थाना प्रभारी जितेन्द्र साहू है, जो बिना वर्दी के मौके पर मौजूद थे। पुलिस के साथ कुछ स्थानीय लोग भी वीडियो में हिंसा में शामिल दिख रहे हैं। चालक के साथ दर्जनों लोगों ने मिलकर मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वीडियो में यह भी दिखा कि भीड़ ने चालक के गुप्तांग पर वार किया, जिससे वह दर्द से कराहते हुए जमीन पर गिर गया।
पुलिस-जनता की मिलीभगत?
यह घटना तब और ज्यादा चिंताजनक हो जाती है जब यह महसूस होता है कि इसमें सिर्फ पुलिस नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की भी भागीदारी है। आम जनता को कानून का पालन कराने वाली पुलिस के साथ इस तरह से किसी पर हमला करते देखना अत्यंत अवैधानिक और असंवेदनशील है।
मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन
इस पूरी घटना ने एक बार फिर मानवाधिकारों की दुहाई देने वालों को झकझोर कर रख दिया है। जिस तरह से एक आम ट्रक चालक को सरेआम पीटा गया, यह स्पष्ट रूप से भारतीय दंड संहिता और मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन है। क्या किसी ट्रैफिक उल्लंघन या वाहन चेकिंग के लिए इस तरह की बर्बरता और सार्वजनिक अपमान जायज है? क्या कानून के रक्षक ही कानून तोड़ेंगे?
अब तक की कार्रवाई
घटना के बाद प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। चारामा थाना प्रभारी सहित किसी भी पुलिसकर्मी पर कोई FIR दर्ज नहीं हुई है, न ही घटना की निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं। यह रवैया पुलिस के खिलाफ बढ़ते अविश्वास को और भी गहरा करता है।
आम जनता में आक्रोश
घटना के वायरल होते ही स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों ने इस कृत्य की तीखी निंदा करते हुए थाना प्रभारी को सस्पेंड करने और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है।
चश्मदीदों का बयान
मौके पर मौजूद कुछ चश्मदीदों के अनुसार, ट्रेलर चालक ने किसी बात को लेकर विरोध किया था, जिस पर थाना प्रभारी आगबबूला हो गए और उन्होंने बिना बात सुने ही मारपीट शुरू कर दी। “वो आदमी बार-बार कह रहा था कि उसने कुछ गलत नहीं किया, लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी,” एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया।