Gariaband. गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बवासीर (भगंदर) के इलाज के दौरान एक आदिवासी युवक की मौत हो गई। जांच में पता चला कि इलाज किसी पंजीकृत डॉक्टर ने नहीं बल्कि झोलाछाप डॉक्टरों ने बिना अनुमति और सुरक्षा साधनों के किया था। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह मामला गरियाबंद सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान पुरुषोत्तम ध्रुव (45 वर्ष), निवासी ग्राम पेण्ड्रा, थाना एवं जिला गरियाबंद के रूप में हुई है।
23 अगस्त को हुई थी शिकायत
थाना गरियाबंद में 23 अगस्त को जागेश्वर देवदास ने मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि बवासीर के इलाज के नाम पर कुछ लोगों ने पुरुषोत्तम ध्रुव की गलत तरीके से सर्जरी की, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मर्ग इंटीमेशन दर्ज कर शव का पंचनामा किया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मंगाई। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मरीज की मौत सर्जरी के दौरान की गई गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही के कारण हुई है।
बिना अनुमति और प्रशिक्षण के की थी सर्जरी
मर्ग जांच के दौरान परिजनों और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पूछताछ में सामने आया कि संजू और बबलू तांडी नामक दो व्यक्तियों ने बिना किसी वैध मेडिकल लाइसेंस या प्रशिक्षण के, पुरुषोत्तम ध्रुव का इलाज और सर्जरी की थी। इलाज के दौरान न तो पर्याप्त चिकित्सा उपकरणों का प्रयोग किया गया और न ही मरीज की सुरक्षा के मानक उपाय अपनाए गए, जिसके चलते ऑपरेशन के दौरान गंभीर संक्रमण और रक्तस्राव हुआ, और अंततः मरीज की मौत हो गई।
ओडिशा से गिरफ्तार हुआ आरोपी बबलू तांडी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपराध क्रमांक दर्ज कर आईपीसी की धारा 304 (अपराधिक मानव वध) के तहत विवेचना शुरू की। तफ्तीश के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि मुख्य आरोपी बबलू तांडी उर्फ थबीर तांडी (54 वर्ष), निवासी ग्राम कोमना, दुरीयापाड़ा, जिला नुवापाड़ा (ओडिशा) में छिपा हुआ है। पुलिस टीम ने ओडिशा पहुंचकर दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि वह अपने साथी संजू के साथ मिलकर बवासीर का इलाज और सर्जरी कर रहा था, जिसके दौरान पुरुषोत्तम की मौत हो गई।
पुलिस ने आरोपी को जेल भेजा
गरियाबंद पुलिस ने आरोपी बबलू तांडी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया। पुलिस अब दूसरे आरोपी संजू की तलाश में जुटी है। इस पूरे प्रकरण की निगरानी स्वयं गरियाबंद पुलिस अधीक्षक द्वारा की जा रही है। इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में बढ़ते झोलाछाप डॉक्टरों के खतरे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां बिना डिग्रीधारी व्यक्ति इलाज के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी बीमारी का इलाज केवल सरकारी या पंजीकृत चिकित्सक से ही कराएं और संदिग्ध व्यक्तियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।