Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में एक बार फिर ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। पचपेड़ी नाका ब्रिज के नीचे स्थित यातायात थाने के बाहर एक युवक से मारपीट और उसकी बाइक को जंजीर से बांधने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश है और प्रशासन से संबंधित पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

■ क्या है पूरा मामला?
घटना आज दोपहर की बताई जा रही है जब एक युवक अपनी बाइक से पचपेड़ी नाका अंडरब्रिज की ओर से गुजर रहा था। उसी दौरान यातायात विभाग के एक आरक्षक ने उसे रोका और सामान्य जांच के तहत उससे वाहन के दस्तावेज – लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन (RC) और अन्य कागजात मांगे। युवक ने खुद को अस्पताल कर्मी बताते हुए कहा कि वह इमरजेंसी ड्यूटी पर है और जल्द अस्पताल पहुंचना जरूरी है। युवक की बात को नजरअंदाज करते हुए ट्रैफिक आरक्षक ने उसकी गाड़ी को जबरन यातायात चौकी के सामने रोक लिया और गाड़ी को लोहे की जंजीर से बांध दिया। जब युवक ने विरोध करते हुए विनती की कि उसे इमरजेंसी में जाना है, तो कथित ट्रैफिक आरक्षक ने उसके साथ धक्का मुक्की और हाथापाई कर दी। युवक ने इस पूरी घटना का विरोध किया, लेकिन मौके पर कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं था।


■ वीडियो वायरल होने के बाद मामला बना चर्चा का विषय
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि युवक अपनी बात समझाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ट्रैफिक आरक्षक उसकी बात को अनसुना कर रहा है और फिर बाद में मारपीट करता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आते ही इसे लेकर लोगों ने ट्रैफिक पुलिस की निंदा शुरू कर दी है। कई लोगों ने कमेंट में लिखा कि “ऐसे में आम जनता की सुरक्षा और अधिकारों की गारंटी कौन देगा?”

■ पीड़ित युवक का बयान
पीड़ित युवक, जो रायपुर के तारकेश्वर जंघेल, बसंत विहार क्षेत्र का निवासी है, ने मीडिया को बताया कि वह वी वाय हॉस्पिटल में किसी कार्यवश गया था और इसके बाद इमरजेंसी कॉल पर ड्यूटी के लिए रवाना हो रहा था। युवक ने कहा – “मैंने ट्रैफिक कांस्टेबल को बताया कि मुझे अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी के लिए जाना है, मेरे पास सभी घर पर कागजात थे मगर उसका फोटो भी कोई भेज नहीं पा रहा है घर में किसी को एंड्रॉइड मोबाइल चलने नहीं आता, फिर भी उन्होंने न मेरी बात सुनी, न जांच की, बल्कि गाड़ी को जंजीर से बांध दिया और मेरे साथ धक्का-मुक्की भी की। यह बेहद अपमानजनक था।” युवक ने यह भी बताया कि उसे मानसिक आघात पहुंचा है और वह अब इस मामले में उच्चाधिकारियों से शिकायत दर्ज करवाएगा।

■ पुलिस प्रशासन का बयान
फिलहाल इस मामले में ट्रैफिक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वायरल वीडियो की जांच करा रहे हैं और संबंधित ट्रैफिक आरक्षक की पहचान कर उससे पूछताछ की जा रही है। विभागीय स्तर पर प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है और जल्द ही इस पर कार्रवाई संभव है।

■ जन आक्रोश और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स का गुस्सा साफ देखने को मिल रहा है। कुछ लोगों ने लिखा कि “
ट्रैफिक पुलिस
को अधिकार हैं, लेकिन संवेदनशीलता और व्यवहार की मर्यादा भी जरूरी है।” कई यूजर्स ने ट्रैफिक पुलिस की मनमानी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं आम जनता और पुलिस के बीच विश्वास की दीवार को तोड़ती हैं।

■ बड़ा सवाल – क्या ट्रैफिक व्यवस्था जनहित में या दमनकारी?
इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या पुलिस द्वारा की जा रही ट्रैफिक व्यवस्था केवल चालान काटने और सख्ती दिखाने तक सीमित हो गई है? कई बार आम नागरिकों के साथ इस प्रकार का बर्ताव देखा गया है, लेकिन मामलों की सुनवाई और कार्रवाई की प्रक्रिया बेहद धीमी होती है, जिससे जनता में असंतोष पनपता है।
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