Bilaspur. बिलासपुर। शहर के रपटा पुल क्षेत्र में लगातार तीन दिनों से दहशत फैलाने वाले उग्र सांड को आखिरकार शनिवार सुबह पकड़ लिया गया। इस सांड में रेबीज़ जैसे खतरनाक लक्षण दिखने के बाद यह बेहद आक्रामक हो गया था और आसपास के इलाकों में लोगों पर हमला कर रहा था। इस दौरान अब तक छह लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जाती है। लगातार हमलों से रपटा पुल और आसपास के मोहल्लों में भय का माहौल बना हुआ था। स्थानीय लोगों के अनुसार, सांड दो दिनों तक अरपा नदी के पुल के नीचे छिपा हुआ था। शनिवार सुबह लगभग 11 बजे यह अचानक बाहर निकला और सड़क पर पैदल जा रहे लोगों पर हमला करने लगा। लोगों ने तुरंत इसकी जानकारी बिलासपुर गौ सेवा धाम के गौसेवक विपुल शर्मा को दी।
गौसेवकों और नगर निगम की टीम ने दिखाई त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही गौसेवक विपुल शर्मा ने नगर निगम अधिकारियों प्रमिल शर्मा, शिवा जायसवाल और संतोष वर्मा को स्थिति से अवगत कराया। कुछ ही मिनटों में निगम कर्मचारी और गौसेवा धाम की टीम मौके पर पहुंच गई। गोपाल कृष्ण, शुभम साहू, शत्रुघन यादव, पप्पू शर्मा सहित नगर निगम के कई कर्मचारियों ने मिलकर रणनीति तैयार की और सांड को घेरने का प्रयास शुरू किया। भीड़ को नियंत्रित रखने और सांड को सुरक्षित पकड़ने में टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। लगभग आधे घंटे तक चली कड़ी कार्रवाई के बाद गौसेवकों और निगम कर्मचारियों ने उग्र सांड को काबू में कर लिया। मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली क्योंकि सांड के हमलों से किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। पकड़े जाने के बाद सांड को सुरक्षित रूप से नगर निगम के गौठान में शिफ्ट कर दिया गया, जहां उसे निगरानी में रखा गया है।
पशु चिकित्सकों ने जताई गंभीर आशंका
पशु चिकित्सकों का कहना है कि जिस पशु में रेबीज़ के लक्षण दिखाई देते हैं, वह अत्यंत खतरनाक हो जाता है और उसकी स्थिति जानलेवा मानी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार, ऐसे पशु आमतौर पर 72 घंटों के भीतर मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति को हमला करते समय चोट लग गई हो या रेबीज़ संक्रमण की आशंका हो, तो उसे तुरंत अस्पताल में जाकर एंटी-रेबीज़ इंजेक्शन लगवाना चाहिए। यह देरी होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। बिलासपुर गौ सेवा धाम ने इस पूरी कार्रवाई में सहयोग करने वाले सभी गौसेवकों, नगर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया है। संस्था का कहना है कि यदि टीम समय पर मौके पर नहीं पहुँचती, तो यह सांड और भी लोगों को नुकसान पहुँचा सकता था। स्थानीय निवासियों ने भी त्वरित कार्रवाई के लिए निगम और गौसेवकों की सराहना की है। सांड के काबू में आने के बाद इलाके में तीन दिनों से फैले भय का अंत हुआ है और लोगों ने राहत की सांस ली है।