शराब घोटाला मामले में EOW ने सौम्या चौरसिया को किया गिरफ्तार

छग

Update: 2026-01-14 15:35 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले (Chhattisgarh Liquor Scam) मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने आज सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया। EOW ने अदालत में उनके खिलाफ प्रोडक्शन वारंट का आवेदन किया था, जिसके बाद आज उन्हें हिरासत में लिया गया। सौम्या अब 16 जनवरी तक रिमांड पर रहेंगी, और इस दौरान EOW उनसे इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहन पूछताछ करेगी। सौम्या चौरसिया तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में उप सचिव के पद पर तैनात थीं और उन्हें इस शराब घोटाले में धन के लेन-देन का प्रमुख समन्वयकर्ता बताया गया है। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW दोनों कर रहे हैं, और यह मामला मुख्य रूप से 2019 से 2022 के बीच का है, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी।
हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका खारिज
इससे पहले सौम्या चौरसिया ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। याचिका पर 8 जनवरी को सुनवाई हुई थी, जिसमें राज्य शासन ने अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। 15 जनवरी को पक्ष रखने के बाद हाईकोर्ट ने सौम्या की अग्रिम जमानत खारिज कर दी। इसके तुरंत बाद EOW ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
शराब घोटाला मामला—कैसे हुआ था घोटाला?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला लगभग ₹2,800 करोड़ से ₹3,200 करोड़ के बीच का बताया जा रहा है। इसमें आरोप है कि सरकारी खजाने को मिलने वाले राजस्व को चूना लगाकर निजी लाभ कमाया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, घोटाला तीन मुख्य तरीकों से अंजाम दिया गया था। अवैध कमीशन (Part A): शराब आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) से प्रति पेटी एक निश्चित कमीशन वसूला गया। नकली होलोग्राम और अवैध बिक्री (Part B): बिना रिकॉर्ड के ‘ऑफ-द-बुक्स’ देशी शराब बेची गई, और नकली होलोग्राम का इस्तेमाल किया गया। इससे सरकारी दुकानों से मिलने वाले पैसे सीधे सिंडिकेट के पास चले गए।
डिस्टिलर्स से घूस (Part C): शराब बनाने वाली कंपनियों को लाइसेंस देने और व्यापार जारी रखने के बदले मोटी रकम ली गई।
प्रमुख आरोपी और सिंडिकेट
इस मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक उच्च पदस्थ लोग शामिल हैं:
अनवर ढेबर: घोटाले का मास्टरमाइंड और सिंडिकेट का प्रमुख।
अनिल टुटेजा: पूर्व IAS अधिकारी, जिन्हें सिंडिकेट को प्रशासनिक संरक्षण देने का आरोप है।
सौम्या चौरसिया: तत्कालीन CMO में उप सचिव, धन के लेन-देन का प्रमुख समन्वयकर्ता।
निरंजन दास और अरुणपति त्रिपाठी: आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी।
चैतन्य बघेल: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र, हालिया चार्जशीट में सिंडिकेट के प्रमुख हैंडलर के रूप में नामजद।
कवासी लखमा: पूर्व आबकारी मंत्री, जिनसे इस मामले में पूछताछ और जांच जारी है।
गिरफ्तारी के बाद आगे की कार्रवाई
EOW सौम्या चौरसिया से इस घोटाले में धन के लेन-देन, नकली होलोग्राम की खरीद और सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के साथ संपर्क के बारे में पूछताछ करेगी। सूत्रों के अनुसार, सौम्या की गिरफ्तारी से इस घोटाले में अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों की भूमिका उजागर होने की संभावना बढ़ गई है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में जनता और मीडिया की निगाहें लगातार EOW की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। घोटाले के खुलासे ने राज्य की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह मामला लंबे समय से चल रहा है और अब सख्त कार्रवाई की गई है।
सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सौम्या की गिरफ्तारी से शराब घोटाले में अन्य नामी अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई तेज होने की संभावना है। वहीं आम जनता इस बात को लेकर उत्सुक है कि आखिरकार कितने बड़े भ्रष्टाचारियों पर कानूनी कार्रवाई हो पाएगी। EOW और ED दोनों एजेंसियों की संयुक्त जांच से यह स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले का दायरा व्यापक था। अब तक सामने आए दस्तावेज और बैंक ट्रांजैक्शन के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी के बाद इस मामले की जांच की गति बढ़ गई है और 16 जनवरी तक रिमांड अवधि के दौरान उनसे पूछताछ की जाएगी।
Tags:    

Similar News