तेलंगाना के ईंट भट्ठे से बंधक श्रमिकों और बच्चों को जिला प्रशासन ने कराया मुक्त

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Update: 2025-12-31 16:37 GMT
Gariaband. गरियाबंद। जिले के देवभोग क्षेत्र से जिला प्रशासन ने एक संयुक्त अभियान के तहत 10 से 12 बंधक श्रमिकों और उनके बच्चों को सुरक्षित रूप से मुक्त कराया। यह कार्रवाई तेलंगाना राज्य के खम्मम जिले में स्थित एक ईंट भट्ठे में बंधक बनाए गए श्रमिकों के मामले में हुई। कलेक्टर बीएस उइके के नेतृत्व में तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पाण्डेय के मार्गदर्शन में गठित विशेष दल ने मौके पर जाकर श्रमिकों और उनके बच्चों को सुरक्षित रूप से बचाया। इस अभियान में पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग और राज्य प्रशासन के अधिकारी शामिल रहे।
मुक्त कराए गए श्रमिकों के परिवारों में 7 बच्चों को भी जिला मुख्यालय वापस लाया गया। जिला बाल संरक्षण समिति ने बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया और उन्हें अस्थायी आवास एवं भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराई। साथ ही, बच्चों और अभिभावकों की मानसिक स्थिति का ध्यान रखते हुए काउंसलिंग भी की गई, ताकि वे सुरक्षित और सशक्त महसूस कर सकें। कलेक्टर बीएस उइके ने इस अभियान की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्रवाई प्रशासन की मानवता और संवेदनशीलता का उदाहरण है। उन्होंने बताया कि बंधक बनाए गए श्रमिकों के पुनर्वास एवं सहायता संबंधी सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
इस अभियान में श्रम विभाग के अधिकारी, पुलिस टीम और महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिला बाल संरक्षण अधिकारी अनिल द्विवेदी ने पुष्टि की कि श्रमिक और उनके बच्चे अब सुरक्षित हैं और आवश्यक पुनर्वास कार्यवाही जारी है। विशेष रूप से इस रेस्क्यू अभियान में शामिल अधिकारियों में श्रम निरीक्षक मनीष बंजारे, डीसीपीयू महिला एवं बाल विकास गोपाल सिंह कंवर, श्रम कल्याण निरीक्षक पुणानंद साहू, राजस्व अधिकारी अजय देवांगन, प्रधान आरक्षक करम जांगड़े और विजय मिश्रा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यवाही के दौरान प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि मुक्त किए गए परिवारों को न केवल तत्काल सुरक्षा और भोजन मिले, बल्कि उनकी मानसिक व शारीरिक स्थिति का पूर्ण ध्यान रखा जाए। बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और अभिभावकों के साथ काउंसलिंग इस प्रयास का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। यह कार्रवाई गरियाबंद जिले में श्रमिकों और उनके बच्चों के प्रति प्रशासन की गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जिला प्रशासन ने बंधक बनाए गए श्रमिकों के सुरक्षित मुक्तिकरण के साथ-साथ उनके पुनर्वास और सहायता के लिए आवश्यक कदम उठाने की प्रक्रिया को भी सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया है। इस अभियान ने यह संदेश दिया कि मानवता, संवेदनशीलता और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से मानवाधिकारों की सुरक्षा संभव है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में सतत निगरानी और त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि किसी भी श्रमिक या बच्चे के साथ असुरक्षा या शोषण न हो। इस प्रकार, गरियाबंद जिला प्रशासन का यह संयुक्त प्रयास श्रमिकों और बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों की रक्षा और समाज में संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बन गया है।
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