झारखंड शराब घोटाले की जांच में छत्तीसगढ़ तक पहुंची ACB

छग

Update: 2026-01-16 16:31 GMT
Raipur. रायपुर। झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच में अब छत्तीसगढ़ तक कार्रवाई का दायरा फैल गया है। झारखंड एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर और दुर्ग जिले में एक साथ छापेमारी की है। इस कार्रवाई से छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी की टीमें कई ठिकानों पर दस्तावेजों और आर्थिक लेन-देन से जुड़े अहम साक्ष्य खंगाल रही हैं। मिली जानकारी के अनुसार, ACB झारखंड की एक टीम रायपुर के पॉश इलाके अशोका रत्न क्षेत्र में स्थित शराब कारोबारी सौरभ केड़िया के ठिकानों पर जांच कर रही है। वहीं दूसरी ओर दुर्ग जिले में भी शराब कारोबार से जुड़े लोगों के परिसरों पर तलाशी ली जा रही है। सूत्रों के मुताबिक यह पूरी कार्रवाई झारखंड में सामने आए शराब घोटाले से जुड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने के उद्देश्य से की जा रही है।

बताया जा रहा है कि झारखंड में देशी शराब की सप्लाई से जुड़े बड़े सिंडिकेट की जांच के दौरान छत्तीसगढ़ के कुछ कारोबारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। इसी के आधार पर ACB ने छत्तीसगढ़ में दबिश दी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि झारखंड में हुए घोटाले की रकम किन-किन रास्तों से बाहर गई और किन लोगों तक पहुंची। इससे पहले झारखंड ACB/EOW ने केडिया डिस्टिलरी के मालिक नवीन केडिया को गोवा से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले जाया गया, जहां उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। आरोप है कि झारखंड में देशी शराब की बड़ी आपूर्ति नवीन केडिया की डिस्टिलरी के माध्यम से की जाती थी। इस कथित अवैध व्यवस्था के चलते झारखंड सरकार को करीब 136 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि झारखंड के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों विनय चौबे और अरुणपति त्रिपाठी को नवीन केडिया की डिस्टिलरी से सप्लाई की गई प्रत्येक कार्टन पर 300 से 600 रुपये तक का कमीशन दिया जाता था। माना जा रहा है कि इसी कमीशनखोरी और अवैध सेटिंग के जरिए शराब की सप्लाई और बिक्री का पूरा सिस्टम संचालित किया जा रहा था। बताया जाता है कि ACB द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बावजूद नवीन केडिया ने एसीबी कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने उसकी
याचिका खारिज
कर दी। इसके बाद वह फरार हो गया था। लंबे समय तक फरार रहने के बाद आखिरकार उसे गोवा से गिरफ्तार किया गया, जिससे जांच एजेंसी को महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ACB की रायपुर और दुर्ग में जारी छापेमारी को लेकर यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसी दस्तावेजों के साथ-साथ डिजिटल डेटा, बैंक ट्रांजेक्शन और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। माना जा रहा है कि शराब घोटाले का यह नेटवर्क केवल झारखंड तक सीमित नहीं, बल्कि कई राज्यों तक फैला हुआ है। फिलहाल ACB की टीमें कार्रवाई में जुटी हुई हैं और आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। लेकिन जिस तरह से छत्तीसगढ़ में दबिश दी गई है, उससे यह साफ है कि झारखंड शराब घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है।
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