Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा के नेतृत्व में उपमुख्यमंत्री अरुण साव से मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों एवं पेंशनरों को 1 जनवरी 2026 की देय तिथि से 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) एवं महंगाई राहत (DR) स्वीकृत करने का आग्रह किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा महंगाई भत्ते में वृद्धि किए जाने के अनुरूप राज्य के कर्मचारियों एवं पेंशनरों को भी देय तिथि से इसका लाभ प्रदान किया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों एवं पेंशनरों को आर्थिक राहत मिलेगी तथा उनके हितों का संरक्षण सुनिश्चित होगा।
फेडरेशन ने उपमुख्यमंत्री को शासकीय सेवकों के हित में ‘मोदी की गारंटी’ के अंतर्गत किए गए वादों का स्मरण कराते हुए मांग के शीघ्र निराकरण के लिए शासन स्तर पर आवश्यक पहल करने का अनुरोध किया। कैबिनेट की बैठक से पूर्व उपमुख्यमंत्री से इस विषय पर मुलाकात को फेडरेशन ने कर्मचारियों एवं पेंशनरों की मांगों को शासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए इन्हें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संज्ञान में लाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखेगी। इस अवसर पर शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी, छत्तीसगढ़ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ के प्रांताध्यक्ष विजय लहरे, छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय संघ के संयोजक संजय शर्मा, नगरीय निकाय पेंशनर्स संघ के प्रांताध्यक्ष श्रवण ठाकुर, दुर्ग जिला कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के महासचिव अनुरूप साहू तथा छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी भानु प्रताप यादव उपस्थित रहे।
रायपुर, 27 अक्टूबर 2026/ छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG-RERA) ने भू-संपदा परियोजनाओं में आबंटियों के हितों की सुरक्षा और रेरा अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। प्राधिकरण ने रायपुर जिले के सेजबहार स्थित 'वात्सल्य गौरव-1, फेज-1' परियोजना के विकास कार्य अपूर्ण रहने तथा पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किए जाने के मामले में प्रमोटर को आबंटी के पक्ष में 6 लाख 87 हजार 496 रुपये ब्याज राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक प्रतिमाह 7 हजार 314 रुपये ब्याज भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।
प्राधिकरण द्वारा प्रकरण की सुनवाई के दौरान पाया गया कि संबंधित परियोजना में स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप विकास कार्य पूर्ण नहीं किए गए हैं। साथ ही सक्षम प्राधिकारी से परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया गया है। इन तथ्यों के आधार पर प्राधिकरण ने परियोजना को अपूर्ण एवं चालू परियोजना की श्रेणी में मानते हुए भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 के अंतर्गत विलंब के लिए ब्याज भुगतान का आदेश पारित किया है।
वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक की अवधि के लिए ब्याज भुगतान का आदेश
प्राधिकरण के आदेश के अनुसार, प्रमोटर को आबंटी द्वारा भुगतान की गई 8 लाख 12 हजार 643 रुपये की राशि पर वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के आधार पर कुल 6 लाख 87 हजार 496 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके साथ ही 1 नवंबर 2026 से परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक आबंटी को प्रतिमाह 7 हजार 314 रुपये की राशि का भुगतान करना होगा।
बिना पंजीयन परियोजना विकसित करने पर पृथक कार्रवाई के निर्देश
प्राधिकरण ने परियोजना का रेरा पंजीयन नहीं कराए जाने के मामले को भी गंभीरता से लिया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भू-संपदा अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत पात्र परियोजनाओं का पंजीयन अनिवार्य है। इसके बावजूद संबंधित परियोजना का पंजीयन नहीं कराए जाने पर प्रमोटर के विरुद्ध अधिनियम की धारा 59 के अंतर्गत पृथक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
भूखंड बेचने मात्र से समाप्त नहीं होती प्रमोटर की जिम्मेदारी
प्राधिकरण के इस आदेश से स्पष्ट है कि किसी परियोजना में भूखंडों का विक्रय कर देने मात्र से प्रमोटर की वैधानिक जिम्मेदारियां समाप्त नहीं हो जाती हैं। स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप सड़क, नाली, विद्युत, पेयजल सहित निर्धारित विकास कार्यों और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करना प्रमोटर का दायित्व है। CG-RERA द्वारा पारित यह आदेश भू-संपदा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और आबंटियों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे यह संदेश भी मिलता है कि परियोजनाओं के विकास में अनावश्यक विलंब तथा रेरा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले प्रमोटरों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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