श्री सीमेंट की मनमानी : पर्यावरण एनओसी के बगैर साइडिंग का विस्तार

Update: 2025-10-28 05:54 GMT

पीएमओ कार्यालय ने लिया संज्ञान, साइडिंग के जांच के आदेश आरटीआई से खुलासा

स्पंज आयरन एसोसिएशन ग्रुप बनाकर ग्रासीम सीमेंट से खऱीदा

लोडिंग यूनिट के रूप ऑटोमेटेड क्लिंकर हाफर लोडिंग प्लांट में तब्दील हो चुका

2018 से श्री सीमेंट के हाथों हो रही संचालित

2020 में आटोमेटिक क्लिंकर हाफर रेलवे रैक लोडिंग के लिए लगाया गया जिसकी पर्यावरण एनओसी नहीं ली गई क्योंकि कानूनन पर्यावरण की एनओसी मिल भी नहीं सकती

छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल की सांठ-गांठ और सिस्टम भूपेश सरकार के समय से चला आ रहा, भूपेश सरकार के समेत साइडिंग की जांच में लीपापोती की गई थी

प्रशासनिक संरक्षण में प्राइवेट मैनुअल रिंगनी हथबंध रेलवे साइडिंग को श्री सीमेंट आटोमेटेड प्लांट में तब्दील में किया शिकायत पीएमओ से जांच और कार्रवाई के आदेश की अव्हेलना, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी ने जांच पेंडिंग कर रोकने की जानकारी

रिंगनी-हथबंध रेलवे साइटिंग को आटोमेटिक प्लांट में तब्दील किया

बलौदाबाजार (जसेरि)। जिले के हथबंद-नेवरा क्षेत्र में स्थित श्री सीमेंट की मनमानी पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लेकर शिकायत पर जांच का आदेश दिया है। रायपुर हैंडलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा.लि. (आऱएचआईपीएल) नामक निजी रेलवे साइडिंग का प्रारंभ में एक साधारण मैनुअल स्थापित की गई थी, इसे अब धीरे-धीरे एक पूरी तरह लोडिंग यूनिट के रूप ऑटोमेटेड क्लिंकर लोडिंग प्लांट में तब्दील कर दिया गया है। वह भी बिना पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी ) और क्षमता विस्तार की विधिवत अनुमति (सीटीई/सीटीओ संशोधन) के, जो सीधा-सीधा नियमों का उल्लंघन है। यह खुलासा समाजसेवी बसंत आडिल द्वारा किए गए दीर्घकालिक दस्तावेज़ीय अनुसंधान एवं आरटीआई सूचनाओं के माध्यम से हुआ है।

भूपेश बघेल की सरकार का खेल

भूपेश बघेल की सरकार के समय से संयंत्रमें सीमेंट्स स्लाइडिंग का कार्य शुरु हुआ था और यह सिस्टम सुचारु रूप से अभी भी चल रहा है। इसे ग्रासिम सीमेंट ने डेवलप करके 1994 सीमेंट को रेलवे रेक में लोड करने के लिए और अस्थाई निर्माण किया था। कुछ साल के बाद स्पंज आयरन एसोसिएशन ग्रुप बनाकर उसे खऱीद लिया या अपने अधीन कर लिया। 2018 में श्री सीमेंट ने सामान्य मैनुअल और साइडिंग को भी अपने अधीन कर लिया था।

मुख्य आरोप और दस्तावेजी साक्ष्य

1. परियोजना की वास्तविक स्थिति:

आरएचईपीएल के माध्यम से श्री सीमेंट द्वारा क्लिंकर का बड़े पैमाने पर परिवहन पिछले चार वर्षों से जारी है। हाल ही में साइडिंग परिसर में विशाल आरसीसी साइलो संरचना का निर्माण पाया गया है, जो क्षमता विस्तार का स्पष्ट संकेत है।

2. अनुमतियों में विसंगति: सीटीई (22.12.2020) और सीटीओ (18.03.2021) पुराने मैनुअल साइडिंग

पीडब्ल्यू से हुई कार्रवाई

संत आडिल द्वारा इस प्रकरण को प्रधानमंत्री कार्यालय (क्करूह्र) में दर्ज कराने पर एमओईएफ एवं सीपीसीबी ने 23 सितम्बर 2025 को पत्र जारी कर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (सीईसीबी ) को जांच और कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। यह पत्र अब सीईसीबी रायपुर के पास जांच के लिए लंबित है और भोपाल स्थित सीपीसीबी क्षेत्रीय कार्यालय को निगरानी हेतु प्रतिलिपि दी गई है।

प्रशासनिक मिलीभगत का संकेत

प्रारंभिक सीटीओ में क्लिंकर लोडिंग व्यवस्था का कोई उल्लेख नहीं था, बावजूद इसके साइट पर हॉपर, कन्वेयर, और साइलो जैसे स्थायी ढांचे स्थापित कर संचालन जारी है। यह स्थिति केवल सीईसीबी की निरीक्षण लापरवाही से संभव हुई। अब साइलो निर्माण के साथ यह साइडिंग एक ‘ऑटोमेटेड मटेरियल हैंडलिंग प्लांट' में तब्दील हो चुकी है।

शिकायतकर्ता की टिप्पणी

बसंत आडिल ने कहा कि यह परियोजना से शासन-प्रशासन की आंखों के सामने अवैध रूप से बढ़ गई है। अब पीएमओ और सीपीसीबी की संज्ञान में आने के बाद उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी। आर एचआईपीएल के सीटीई-सीटीओ दस्तावेज़ों का विश्लेषण, डीपीआर लागत विसंगतियाँ, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) की चूक, और जांच प्रक्रिया की अब तक की प्रगति का ब्यौरा । सीटीओ संशोधन (29.04.2022 और 09.04.2024) में मात्रा समान रखी गई, किंतु वस्तु विवरण (क्लिंकर/सीमेंट) हटा दिया गया। यह परिवर्तन नियमों से बचने और जांच को भ्रमित करने के उद्देश्य से किया गया प्रतीत होता है।

3. लागत और रिपोर्टिंग में गड़बड़ी: ष्ठक्कक्र में साइलो निर्माण लागत मात्र 8.95 करोड़ दिखाई गई, जबकि साइट पर अनुमानित लागत 100 करोड़ से अधिक है। यह लागत छिपाकर पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) और स्वीकृति प्रक्रिया से बचने की कोशिश है।

4. परिवहन आंकड़ों में बड़ा अंतर: रेलवे आरटीआई के अनुसार वर्ष 2023-24 में 30,44,591 टन क्लिंकर का परिवहन हुआ, जबकि आरएचपीएल के एनवायरनमेंट स्टेटमेंट में इसके विपरीत आंकड़े दर्ज हैं - जिससे गलत रिपोर्टिंग और नियामक धोखाधड़ी का संदेह गहराता है।

भूपेश सरकार के समय से चालू

भूपेश सरकार के समय से चालू प्रथा अब भी जारी है पीएमओ में शिकायतकर्ता ने फिर से शिकायत दर्ज कराई है जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने पर्यावरण मंत्रालय को लेटर लिखकर सीधा पूछा है कि पर्यावरण कानूनों की धज्जियां उड़ाने वाले इतने बड़े प्लांट को बिना पर्यावरण एनओसी के कैसे चालू कराया. ये सब बातें अब मंत्रालय के अधीन आने पर मंत्रालय ने छग पर्यावरण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी रायपुर को जाँच के आदेश दिए जो अब भी पेंडिंग है जबकि जांच तुरंत कर केंद्रीय मंत्रालय और पीएमओ को सूचित करना था। शिकायतकर्ता द्वारा अंतिम बार 2/9/2025 फ़ोटो और वीडियो के साथ सम्पूर्ण दस्तावेज़ की कॉपी लगाकर शिकायत की गई है जिसके उपरांत पीएमओ ने जाँच के लिए ये आदेश जारी किया।

आरएचआईपीएल के सीटीई-सीटीओ दस्तावेजों के विश्लेषण, डीपीआर लागत विसंगतियां, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए) की चूक, और जांच प्रक्रिया की अब तक की प्रगति का ब्यौरा और लोडिंग माफिया की नाड़ा पैजामा छाप नेताओं की पोल खोली जाएगी। जो भूपेश सरकार के समय से सिस्टम बना हुआ है। उसका खुलासा किया जाएगा। आरटीआई के दस्तावेज के अनुसार संपूर्ण दो नंबर का सिस्टम 2018 के बाद निर्मित हुआ। जो अब तक बरकरार है और आश्चर्य का विषय बन गया है। या कहे कि सरकार को बदनाम करने की हो रही साजिश।

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