Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि पत्नी और उसकी बहनों को लगातार अभद्र संदेश भेजने जैसा व्यवहार मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आ सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अंबिकापुर के कुटुंब न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी की तलाक की याचिका खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के विवाह को भंग करने का आदेश देते हुए तलाक की अनुमति दे दी। यह फैसला 23 सितंबर 2026 को जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की युगलपीठ ने सुनाया। हाईकोर्ट ने मामले में पेश साक्ष्यों, पक्षकारों के व्यवहार और WhatsApp संदेशों को ध्यान में रखते हुए निचली अदालत के फैसले को पलट दिया।

मामले के अनुसार अर्चना सिंह का विवाह 5 दिसंबर 2021 को बिहार के भोजपुर निवासी आनंद कुमार गुप्ता से हुआ था। पत्नी की ओर से आरोप लगाया गया कि विवाह के कुछ समय बाद ही पति का व्यवहार उसके प्रति बदल गया। उसने पति पर मारपीट और गाली-गलौज करने का आरोप लगाया। पत्नी का यह भी आरोप था कि उससे दहेज के रूप में एयर कंडीशनर की मांग की गई थी। पत्नी ने न्यायालय के समक्ष आरोप लगाया कि मांग पूरी नहीं होने पर उसे अपने गहने बेचने के लिए कहा गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई। पति-पत्नी के बीच विवाद लगातार बढ़ने के बाद पत्नी अंबिकापुर स्थित अपने मायके लौट आई। इसके बावजूद दोनों के बीच विवाद समाप्त नहीं हुआ।

पत्नी की ओर से अदालत को बताया गया कि मायके आने के बाद भी पति की तरफ से उसे परेशान किया जाता रहा। आरोप है कि पति ने उसके मोबाइल फोन पर अभद्र संदेश भेजे। इतना ही नहीं, पत्नी की दो छोटी बहनों को भी WhatsApp के माध्यम से आपत्तिजनक और अभद्र संदेश भेजे गए। इन संदेशों को पत्नी ने वैवाहिक संबंध में मानसिक क्रूरता के प्रमाण के रूप में अदालत के सामने पेश किया। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान इन WhatsApp संदेशों को गंभीरता से लिया। न्यायालय के समक्ष पेश संदेशों को चुनौती नहीं दिए जाने का पहलू भी महत्वपूर्ण रहा। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और पक्षकारों के आचरण का परीक्षण करते हुए माना कि पत्नी और उसकी बहनों को इस प्रकार के अभद्र संदेश भेजने वाला व्यवहार वैवाहिक जीवन में मानसिक पीड़ा का कारण बन सकता है और परिस्थितियों के आधार पर इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है।

इससे पहले पत्नी ने अंबिकापुर के कुटुंब न्यायालय में विवाह विच्छेद के लिए याचिका दायर की थी। कुटुंब न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद पत्नी की तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी। निचली अदालत के इस फैसले से असंतुष्ट पत्नी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और आदेश के खिलाफ अपील दायर की। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने अपील पर सुनवाई करते हुए मामले से जुड़े साक्ष्यों और परिस्थितियों की समीक्षा की। कोर्ट ने पत्नी और उसकी बहनों को भेजे गए संदेशों सहित पक्षकारों के व्यवहार को ध्यान में रखते हुए कुटुंब न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अर्चना सिंह और आनंद कुमार गुप्ता के विवाह को भंग करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट का यह फैसला वैवाहिक विवादों में डिजिटल संवाद और WhatsApp संदेशों के साक्ष्य के रूप में महत्व को भी रेखांकित करता है।
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