छत्तीसगढ़ में स्कूल शुल्क बढ़ा, नए शिक्षा सत्र से अभिभावकों पर बढ़ेगा आर्थिक भार

छग

Update: 2026-05-19 15:27 GMT
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में नए शिक्षा सत्र 2026-27 से सरकारी हाईस्कूल और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए विभिन्न स्थानीय शुल्कों में बढ़ोतरी की गई है। राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग की अनुशंसा पर शुल्क वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अगले शिक्षा सत्र से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। जानकारी के अनुसार, लोक शिक्षण संचालनालय ने स्कूलों में आयोजित होने वाली
विभिन्न गतिविधियों
, परीक्षा सामग्री, खेल सामग्री और विज्ञान प्रयोगशाला से जुड़ी वस्तुओं की बढ़ती लागत को देखते हुए शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। प्रशासकीय समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य शासन ने स्थानीय शुल्क में आंशिक वृद्धि को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, विद्यालयों में सांस्कृतिक, शैक्षणिक और खेल गतिविधियों के संचालन के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ रही है। साथ ही विज्ञान प्रयोगशालाओं में उपयोग होने वाली सामग्री, खेल उपकरण और अन्य जरूरी शैक्षणिक संसाधनों की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए शुल्क संशोधन का निर्णय लिया गया है। हाईस्कूल स्तर पर कई मदों में शुल्क बढ़ाए गए हैं। कार्यकलाप शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये कर दिया गया है। निर्धन छात्र सहायता निधि 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये की गई है। विज्ञान क्लब निधि 20 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये कर दी गई है। बलचर निधि 50 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये की गई है। वहीं क्रीड़ा निधि 50 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये कर दी गई है। विज्ञान प्रायोगिक शुल्क भी 50 रुपये से बढ़ाकर 65 रुपये कर दिया गया है।

हालांकि रेडक्रॉस निधि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है और यह पहले की तरह 30 रुपये ही रहेगी। इसी प्रकार उच्चतर माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए भी विभिन्न शुल्कों में वृद्धि की गई है। कार्यकलाप शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दिया गया है। निर्धन छात्र सहायता निधि 10 रुपये से बढ़ाकर 15 रुपये की गई है। विज्ञान क्लब निधि 20 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये कर दी गई है। बलचर निधि 50 रुपये से बढ़ाकर 60 रुपये की गई है। क्रीड़ा निधि 65 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दी गई है। विज्ञान प्रायोगिक शुल्क 70 रुपये से बढ़ाकर 85 रुपये कर दिया गया है। रेडक्रॉस निधि यहां भी 30 रुपये ही रखी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि यह वृद्धि सीमित और आवश्यक जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार बढ़े हुए शुल्क का उपयोग स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, प्रयोगशाला सामग्री खरीदने, खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों के संचालन में किया जाएगा।

हालांकि शुल्क वृद्धि की खबर सामने आने के बाद अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। कई अभिभावकों का कहना है कि पहले से ही शिक्षा, परिवहन और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क का असर सीधे परिवार के बजट पर पड़ेगा। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी चुनौती बन सकती है। कुछ अभिभावकों ने यह भी मांग की है कि यदि शुल्क बढ़ाया जा रहा है तो स्कूलों में सुविधाओं और संसाधनों में भी स्पष्ट सुधार दिखाई देना चाहिए। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलना जरूरी है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी
स्कूलों को निर्देश
दिए जाएंगे कि शुल्क वृद्धि से संबंधित जानकारी अभिभावकों और विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बढ़े हुए शुल्क का उपयोग निर्धारित मदों में ही किया जाए। नए शिक्षा सत्र में यह संशोधित शुल्क व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यभर के हजारों विद्यार्थियों और अभिभावकों पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा। फिलहाल स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग आगामी सत्र की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
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