रायपुर (जसेरि)। प्रदेश में बड़े प्रोजेक्ट्स के टेंडर में भारी भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। कांग्रेस की पिछली सरकार में जो काम खुलेआम हुआ करते थे वहीं अब भ्रष्ट अधिकारी परदे के पीछे और उससे दुगने स्तर पर हो रहे हैं। लगभग सभी विभागों और भ्रष्ट अधिकारी के दूसरे अनुशांगिक इकाइयों में अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने के मनचाहे शर्तें और नियम कायदे बनाकर राज्य के फर्मों और एंजेसियों से कार्य छिने जा रहे हैं। इतना ही नहीं सरकार के अलग-अलग विभागों में टेंडर की शर्ते, नियम-कायदे और दरें भी अलग-अलग हैं जो खुलेआम कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हैं।
राज्य सरकार के विभाग एनआरएएनवीपी एवं सीएसआईडीसी द्वारा जारी निविदा में भी ऐसी शर्तें लगाई गई हैं जो पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा के विपरीत हैं। इन दोनों विभागों में निविदा की शर्तों को लेकर कोई नियम-कायदे नहीं हैं। निविदा में ऐसी-ऐसी शर्ते और नियम रखे गए हैं जिसे उनके चहेते और कुछ गिने-चुने ठेकेदार ही पूरा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए निविदाओं में पाइपलाइन, इलेक्ट्रीकल, सिवरलाइन के लिए भी कंडीशन लगाए गए हैं। इंडस्ट्रीय पार्क डेव्हलपमेंट के कार्य में 13 किमी पाइपलाइन होना चाहिए, इसके अतिरिक्त कई ऐसी बाध्यताएं रखी गई हैं जिसे सिर्फ उनके भ्रष्ट अधिकारी के चहेते ठेकेदार ही पूरा कर सकते हैं। डीवी प्रोजेक्ट लि. और श्रीजी कृपा इंफ्रा जैसे कुछ गिने-चूने एंजेसियां ही उनके शर्तों को पूरा करती हैं जिन्हें 18फीसदी अधिक दर पर निविदा अवार्ड कर दी जाती हैं। सालों यही होते आ रहा है। जबकि इसी कार्य के निविदा पीडब्लयूडी करती है तो 18 फीसदी बिलोव दर आते हैं। कुल मिलाकर 36 प्रतिशत अधिक दर पर कार्य दिया जा रहा है। इससे साफ पता चलता है कि मंत्री-अधिकारी निविदा के लिए प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता अपनाना ही नहीं चाहते और कमीशनखोरी व भ्रष्टाचार के लिए चहेते एजेंसियों को टेंडर अवार्ड कर रहे हैं।
जानकारी मुताबिक वर्तमान में सीएसआईडीसी के द्वारा 143 करोड़ की निविदा बुलाई गई है। इसमें 1. 13 किमी डीआई पाईप/एचडीपीई पाइप/सीएल पाइप 100 एमएम डीआईए का किया होना चाहिए शर्त लगाई गई है। 2. स्ट्रीट लाईट एलईडी 112 एनओएस शर्त लगाई गई है। जो यह कार्य किया हो वह निविदा में पात्र होगा। प्रश्न यह है कि कोई ठेकेदार 1 किमी किया या 1 लाइट लगाया हो तो क्या वह उपरोक्त कार्य नहीं कर सकता। जबकि सीएसआईडीसी की निविदा में मुख्य कार्य रोड निर्माण का है। जाहिर ऐसी शर्तों का रखकर कर कंपनियों को रोकना और भ्रष्टाचार के लिए राह आसान करना ही एक मात्र उद्देश्य है। सीएसआईडीसी की तीन निविदाओं में से एक में जो 142 करोड़ की है उसमें सिर्फ पांच ठेकेदारों ने भाग लिया है, दूसरी निविदा 30 करोड़ की है जिसमें सिर्फ तीन ठेकेदारों ने भाग लिया है वहीं तीसरी निविदा जो 106 करोड़ की है उसमें भी सिर्फ चार ठेकेदारों ने ही भाग लिया है। इन सभी में दो निविदा रायपुर कंस्ट्रक्शन असगर खान, अकबर खान व डीवी प्रोजेक्ट की है।
टेंडर की इन प्रक्रियाओं से साफ है कि निविदा आबंटन के लिए कांग्रेस सरकार की तरह भ्रष्ठ अधिकारी द्वारा नियम-कायदे व शर्तें अपनाई जा रही हैं। भ्रष्ट अधिकारी जो काम कांग्रेस सरकार में खुलेआम होता था वह अब परदे के पीछे और बड़े स्तर पर हो रहा हैं। कांग्रेसी के सभी ठेकेदार अब भाजपा के समर्थक बनने की कोशिश कर रहे हैं और भ्रष्ट अधिकारी को मोटे कमीशन देकर अपना कारोबार चला रहे हैं जिससे भ्रष्ट अधिकारी मोटी कमाई कर रहे हैं। भ्रष्ट ठेकेदार और अधिकारी द्वारा भाजपा को बदनाम करने की कोशिश जारी है।
कांग्रेस समर्पित भ्रष्ट अधिकारियों का उदाहरण
चर्चा गर्म है... और पूरे विभाग में हल्ला है....पिछले दिनों तीन मेडिकल कालेजों के लिए एक साथ टेंडर निकाला गया था। ताकि निविदा प्रक्रिया में देश भर की एजेंसियां भाग ले सकें और गुणवत्ता पूर्वक कार्य हो सके। इसका टेंडर एलएंडटी कंपनी को मिल गया परन्तु डीवी प्रोजेक्ट लिमि. और श्रीजी कृपा व कन्हैयालाल अग्रवाल फर्मों ने इसका खूब विरोध किया। जिसकी खूब चर्चा मंत्रालय एवं राजधानी में हो रही है। टेंडर आबंटन को लेकर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित करवाई गई, परिणामत: निविदा निरस्त कर दी गई। बाद में कुछ महीने बाद 300 करोड़ का यही टेंडर डीवी प्रोजेक्ट और श्रीजी कृपा को 18 फीसदी अधिक दर पर अवार्ड कर दी गई। कहीं यह सब सरकार को बदनाम करने की अंदरुनी साजिश तो नहीं।
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