Bhilai. भिलाई। भिलाई की रिचा सेन को आज उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने पीएचडी (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी) की उपाधि प्रदान की। यह सम्मान दुर्ग स्थित भारती यूनिवर्सिटी में आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान दिया गया। रिचा सेन ने जैव प्रौद्योगिकी विषय में अपना शोध कार्य पूर्ण कर विद्यावाचस्पति की उपाधि अर्जित की है। रिचा सेन, वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की धर्मपत्नी हैं। उन्होंने “नगर पालिका ठोस अपशिष्ट लैंडफिल से कवक की स्क्रीनिंग एक कुशल भारी धातु जैवअवशोषक के रूप में” विषय पर शोध किया है। उनका यह शोध कार्य पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान माना जा रहा है। यह शोध डॉक्टर श्वेता एन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। अपने शोध के दौरान रिचा सेन ने ठोस अपशिष्ट लैंडफिल क्षेत्रों से प्राप्त कवक (फंगी) की पहचान और उनकी स्क्रीनिंग की। शोध का मुख्य उद्देश्य यह जानना था कि किस प्रकार कुछ विशेष प्रकार के कवक भारी धातुओं को अवशोषित करने की क्षमता रखते हैं। भारी धातुएं जैसे सीसा, कैडमियम, पारा और क्रोमियम पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक मानी जाती हैं और इनके कारण मिट्टी, जल स्रोत और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
शोध में यह सामने आया कि कुछ चयनित कवक भारी धातुओं को प्रभावी रूप से जैवअवशोषित कर सकते हैं। इससे औद्योगिक अपशिष्ट और नगर पालिका ठोस कचरे के सुरक्षित प्रबंधन में नई संभावनाएं खुलती हैं। यह शोध भविष्य में पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के विकास में सहायक हो सकता है और प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में उपयोगी सिद्ध हो सकता है। दीक्षांत समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने रिचा सेन को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार का शोध न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने कहा कि युवाओं और शोधार्थियों को ऐसे विषयों पर अनुसंधान के लिए आगे आना चाहिए, जिससे सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति, कुलपति, प्राध्यापकगण, शोधार्थी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह के दौरान अन्य विद्यार्थियों को भी विभिन्न विषयों में डिग्रियां प्रदान की गईं। रिचा सेन की इस उपलब्धि पर उनके परिवारजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त किया। स्थानीय स्तर पर भी उनकी इस सफलता को प्रेरणादायक बताया जा रहा है। उनका यह शोध कार्य न केवल भिलाई बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।