Raipur Breaking: आवारा पशु पकड़ो अभियान जारी, फिर भी सड़कों पर दिखे गौवंश

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Update: 2025-07-25 16:40 GMT
Raipur. रायपुर। रायपुर नगर पालिक निगम द्वारा शहर को आवारा पशुओं से मुक्त करने का अभियान इन दिनों जोरों पर है। महापौर मीनल चौबे, स्वास्थ्य विभाग अध्यक्ष गायत्री सुनील चंद्राकर तथा आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर नगर निगम के सभी जोन कार्यालयों की टीमों ने शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर लगातार मॉनिटरिंग अभियान चलाकर आवारा मवेशियों की धरपकड़ कर उन्हें गौठानों में भेजने की कार्यवाही तेज कर दी है। नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को अलग-अलग जोनों में कुल 22 आवारा पशुओं को पकड़ा गया। निगम के काऊकैचर वाहनों की मदद से उन्हें गोकुल नगर सहित विभिन्न गौठानों में भेजा गया।

विभिन्न जोनों में धरपकड़ की स्थिति:
जोन 1 में मौल श्री विहार मार्ग से 1 आवारा पशु पकड़ा गया।
जोन 3 अंतर्गत डुमरतराई मुख्य मार्ग से 4 मवेशियों की धरपकड़ कर उन्हें गौठान में स्थानांतरित किया गया।
जोन 6 क्षेत्र के भाठागांव नए मार्ग में सबसे अधिक 13 आवारा पशु पकड़े गए।
जोन 4 क्षेत्र के वार्ड 57 (महिला थाना के पास), वार्ड 34 (शहीद भगत सिंह चौक) और वार्ड 46 (पुलिस लाइन रोड) से क्रमशः 1-1 मवेशियों को पकड़ा गया।

नगर निगम प्रशासन का कहना है कि यह अभियान प्रतिदिन जारी रहेगा और इसके अंतर्गत नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे अपने मवेशियों को खुला न छोड़ें। यदि ऐसा करते हुए कोई पाया गया तो उस पर जुर्माना और पशु जब्ती की कार्यवाही की जाएगी। निगम अधिकारियों का कहना है कि आवारा पशुओं के कारण ट्रैफिक जाम, सड़क हादसे, साफ-सफाई में अवरोध और नागरिकों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न होता है, जिसे रोकना प्राथमिकता है।


जमीनी हकीकत और नागरिकों की चिंता:
हालांकि नगर निगम द्वारा की जा रही इस कार्रवाई का दावा कागजों में प्रभावशाली दिखता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है। शहर के कई प्रमुख मार्गों जैसे तेलीबांधा चौक, फाफाडीह, मंदिर हसौद रोड, देवेन्द्र नगर, भनपुरी, टिकरापारा क्षेत्र में आज भी आवारा पशुओं का जमावड़ा देखा जा सकता है। कई स्थानों पर मवेशी खुले में सड़क के बीच बैठकर ट्रैफिक को बाधित करते हैं, जिससे जाम की स्थिति बन जाती है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि निगम की टीमें कुछ क्षेत्रों में सक्रिय तो हैं, लेकिन यह अभियान सतही और सीमित क्षेत्र में केंद्रित रह गया है। नियमित मॉनिटरिंग, रात के समय की निगरानी और ज्यादा प्रभावी पेट्रोलिंग की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

स्थानीय नागरिकों ने जताई नाराजगी:
फाफाडीह क्षेत्र के निवासी रवि ठाकुर ने बताया, “पिछले सप्ताह एक बाइक सवार युवक की टक्कर एक आवारा सांड से हो गई थी, जिसमें उसे गंभीर चोटें आईं। नगर निगम के दावे सिर्फ प्रेस नोट में अच्छे लगते हैं, लेकिन सच्चाई सड़कों पर बिखरी पड़ी है।” इसी तरह महिला निवासी अंजलि वर्मा कहती हैं, “रात के समय सबसे ज्यादा खतरा होता है, क्योंकि सड़कों पर अंधेरे में मवेशी अचानक सामने आ जाते हैं और वाहन चालकों के लिए खतरा बनते हैं।”
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