कांग्रेस समर्थितों को लाभ पहुंचाने का आरोप, एक दुकान के पीछे तीन से साढ़े तीन लाख के कथित लेनदेन की चर्चा ?
आवेदन निरस्त होने वाले आवेदक पहुंचे विधायकों के दरबार, दुकानों की सूची सार्वजनिक हो
रायपुर (जसेरि)। राजधानी में उचित मूल्य राशन दुकानों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 54 राशन दुकानों के आवंटन में कांग्रेस समर्थित लोगों को लाभ पहुंचाए जाने की चर्चा है। आरोप है कि दुकान हासिल करने के लिए तीन से साढ़े तीन लाख रुपए तक के लेनदेन की बात सामने आई है। हालांकि, इस पूरे मामले की खाद्य विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। दूसरी ओर पीडीएस संघ के अध्यक्ष नरेश बाफना ने किसी से पैसा लिए जाने के आरोप को पूरी तरह नकार दिया । बताया जा रहा है कि राशन दुकान के लिए आवेदन करने वाले कई लोगों के आवेदन छोटी-छोटी कमियां बताकर निरस्त कर दिए गए, जबकि बाद में उन्हीं क्षेत्रों में अन्य लोगों को दुकानें आवंटित किए जाने की जानकारी सामने आई है। एक राशन दुकान संचालक के अनुसार उसके परिचितों के आवेदन भी कमियां बताकर निरस्त कर दिए गए। इसके बाद राजधानी में करीब 54 लोगों को कथित तौर पर एक दुकान के पीछे तीन से साढ़े तीन लाख रुपए लेकर राशन दुकान दिए जाने की चर्चा शुरू हुई। मजे की बात राशन दुकान देने के पहले मंत्री, विभाग के सेक्रेट्री और संबंधित क्षेत्र के विधायक को भी जानकारी दी जाती है लेकिन 54 दुकानों के एलाटमेंट के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं होना बताया जा रहा है।
आवंटन किस आधार पर, सवालों के घेरे में प्रक्रिया
राशन दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पात्रता तय करने और चयन करने का आधार क्या रहा। यदि आवेदनकर्ताओं के आवेदन निरस्त किए गए तो उनकी कमियां क्या थीं और बाद में जिन लोगों को दुकानें मिलीं, वे किन मापदंडों पर पात्र पाए गए? यही सवाल अब उन लोगों के बीच चर्चा का विषय है, जिन्होंने दुकान के लिए आवेदन किया था। राजधानी में राजनीतिक पहुंच और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पसंद के आधार पर राशन दुकानें मिलने की चर्चा पहले भी होती रही है। सरकार बदलने के बाद पुराने राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों से दुकान संचालन वापस लेकर नए लोगों को देने की मांग भी भाजपा नेताओं की ओर से उठती रही है। लेकिन इस बार सवाल उल्टा खड़ा हो गया है कि यदि पिछली सरकार से जुड़े लोगों को दुकानें मिली हैं तो आवंटन किस प्रक्रिया और किस नियम के तहत हुआ? क्या मंत्री, और विधायक को भी जानकारी नहीं दी गई। आनन फानन में गुप्त तरीके से देने की मंशा समझ नहीं आ रहा है।
ट्रांसपोर्टरों की कमी
ट्रांसपोर्टरों की कमी के कारण सितंबर माह का राशन 29 सितंबर तारीख तक सभी दुकानदारों तक पहुंच नहीं पाया था इस लिए सितंबर माह का कोटा 15 अक्टूबर तक बढ़ाया गया है। कम दुकान होने पर भी समय पर राशन की सप्लाई ठीक ढंग से नहीं हो पा रही है तो अतिरिक्त 54 दुकान नया देने से तो समस्या तो और भी बढ़ जाएगी। जिसका भुगतमान सरकार को भुगतना पड़ेगा, आखिर अधिकारी किसके शह पर शासन को बदनाम करने की ठान लिए हैं यह भी अनुत्तरित सवाल है।
सूची सामने आए तो खुल सकती है पूरी तस्वीर
राजधानी में कौन सी राशन दुकान किस समिति या संस्था के नाम पर संचालित हो रही है, इसकी जानकारी सामने आने पर काफी हद तक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। आवंटन आदेश, आवेदन करने वालों की सूची, पात्र-अपात्र आवेदकों का विवरण और वर्तमान संचालन एजेंसी का मिलान किया जाए तो यह पता चल सकता है कि दुकानें नियम के तहत आवंटित हुई हैं या राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल हुआ। मामले को लेकर भाजपा से जुड़े कुछ लोगों के बीच भी नाराजगी की चर्चा है। बताया जा रहा है कि संगठन स्तर पर शिकायत करने की तैयारी की जा रही है। वहीं बड़ी सं या में लोग अब अपने-अपने क्षेत्र के विधायकों से राशन दुकान आवंटन की मांग लेकर पहुंच रहे हैं।
गरीबों के राशन पर भी लगातार शिकायतें
राशन दुकानों के आवंटन का विवाद ही नहीं, बल्कि मौजूदा दुकानों के संचालन को लेकर भी हितग्राहियों की शिकायतें कम नहीं हैं। शहर से लेकर गांव तक उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई राशन दुकानें निर्धारित समय पर नहीं खुलतीं। दुकान खुलने के बाद भी राशन वितरण में देरी और कई बार अनावश्यक चक्कर लगाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। हितग्राहियों का आरोप है कि शिकायत खाद्य विभाग तक पहुंचाने के बाद भी कई मामलों में कार्रवाई महज खानापूर्ति तक सीमित रह जाती है। इससे दुकानदारों के हौसले बढ़ने की बात कही जा रही है। गरीबों को मिलने वाले खाद्यान्न में गड़बड़ी या अनियमितता की शिकायतों को लेकर भी विभागीय निगरानी पर सवाल उठते रहे हैं।
बायोमैट्रिक में अंगूठा नहीं लगा तो परेशानी
राशन लेने के दौरान बायोमैट्रिक सत्यापन अनिवार्य होने से बुजुर्गों और ऐसे हितग्राहियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिनके अंगूठे के निशान स्पष्ट नहीं आते। हितग्राहियों का कहना है कि कई बार मशीन में अंगूठा नहीं लगने के कारण उन्हें राशन नहीं मिल पाता। आरोप है कि वैकल्पिक प्रक्रिया होने के बावजूद कुछ दुकानदार इसका पालन नहीं करते। इसके चलते हितग्राहियों को कई दिनों तक राशन के लिए दुकान के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे मामलों में विभागीय अधिकारियों से शिकायत के बावजूद तत्काल राहत नहीं मिलने की बात कही जा रही है।
सुबह आठ बजे का समय, दुकानें दस बजे तक बंद
कई उपभोक्ताओं का कहना है कि राशन दुकानों के खुलने का निर्धारित समय सुबह आठ बजे है, लेकिन कुछ दुकानें दस बजे तक भी नहीं खुलतीं। इसके बाद दुकानदार अपनी सुविधा के अनुसार दुकान खोलते और बंद करते हैं। कामकाजी लोगों, महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
दस्तावेज सामने आए तो आरोपों की होगी पुष्टि या खंडन
राशन दुकान आवंटन से जुड़े आरोपों की वास्तविकता दस्तावेजों से ही सामने आ सकती है। विभाग यदि संबंधित दुकानों की आवंटन सूची, आवेदनकर्ताओं की पात्रता, निरस्त आवेदनों का कारण और चयनित समितियों का विवरण सार्वजनिक करता है तो स्थिति साफ हो सकती है। फिलहाल आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन करीब 54 दुकानों के आवंटन और लाखों रुपए के कथित लेनदेन की चर्चा ने खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
खाद्य अधिकारी ने कहा सब
नियम से हुआ
राशन दुकानों के कथित आवंटन और लेनदेन के आरोपों के संबंध में जानकारी लेने पर उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। सभी समूहों को नियमत: दुकानें आबंटित की गई है।
- भूपेंद्र मिश्रा, फूड कंट्रोलर, रायपुर
किसी से पैसा नहीं लिया गया
राशन दुकानों के आवंटन में तीन से साढ़े तीन लाख रुपए लेने जैसी कोई बात नहीं है, किसी से पैसा नहीं लिया गया है। लेनदेन की खबर बेबुनियाद है।
- नरेश बाफना, पीडीएस संघ अध्यक्ष
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