स्वच्छता सर्वे की तैयारियों पर सवाल, चार तरह के कचरे का पृथक्करण अधूरा

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Update: 2026-06-16 17:28 GMT
Bilaspurबिलासपुर। बिलासपुर नगर निगम की स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग की तैयारी इस बार अधूरी दिखाई दे रही है। हाल ही में स्वच्छता सर्वे टीम के शहर से लौटने के बाद कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर कई कमियां सामने आई हैं। शहर में चार तरह के कचरे को अलग-अलग संग्रहित करने की व्यवस्था अभी पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है, जिससे निगम की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार अब कचरे को चार श्रेणियों में विभाजित करना अनिवार्य किया गया है- गीला कचरा, सूखा कचरा, घरेलू
खतरनाक कचरा
और सैनिटरी वेस्ट। इसके लिए हर घर और दुकान में चार रंगों वाले डस्टबिन की व्यवस्था जरूरी है, लेकिन बिलासपुर में लगभग 1.29 लाख मकानों और दुकानों तक यह व्यवस्था अभी नहीं पहुंच पाई है।
स्थिति यह है कि शहर में चार कंपार्टमेंट वाले कचरा वाहनों की भी कमी है। नगर निगम के पास फिलहाल केवल 25 ऐसी गाड़ियां हैं, जबकि 70 वार्डों के हिसाब से इनकी संख्या पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। कचरे के वैज्ञानिक निपटान और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई यह व्यवस्था अभी जमीनी स्तर पर कमजोर नजर आ रही है। नगर निगम ने 1.29 लाख डस्टबिन की खरीद के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है, लेकिन इसे अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। इसी तरह नए कचरा वाहनों की खरीद और मौजूदा वाहनों में बदलाव का प्रस्ताव भी लंबित है। इसके कारण शहर में अभी भी अधिकांश स्थानों पर केवल दो तरह का कचरा गीला और सूखा ही अलग किया जा रहा है।
कई वार्डों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित किया जा रहा है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक घरों तक पर्याप्त डस्टबिन और संग्रहण व्यवस्था नहीं पहुंचेगी, तब तक चार श्रेणी वाला सिस्टम प्रभावी नहीं हो पाएगा। इस मुद्दे पर महापौर पूजा विधानी ने कहा कि डस्टबिन खरीदने की योजना तैयार की जा रही है और एमआईसी में प्रस्ताव आने के बाद प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कचरा गाड़ियों को चार कंपार्टमेंट में बदलने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कचरा अलग-अलग संग्रहित किया जा सके।
वहीं नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी और डिप्टी कमिश्नर प्रवेश कश्यप ने दावा किया कि स्वच्छता सर्वे के पहले चरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और शहर का प्रदर्शन मजबूत है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में ओडीएफ और अन्य मानकों पर काम किया जाएगा। उनके अनुसार 60 से 90 नई कचरा गाड़ियों का प्रस्ताव भेजा गया है, जिससे सफाई व्यवस्था और बेहतर होगी। हालांकि जमीनी हकीकत यह है कि वर्तमान में कचरा प्रबंधन का पूरा ढांचा अभी भी दो श्रेणियों पर ही आधारित है, जिससे स्वच्छता सर्वेक्षण के मानकों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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