निर्माण कार्य आईडी जारी न होने पर जनप्रतिनिधियों का विरोध तेज
NH-130 पर चक्काजाम की चेतावनी
Korba. कोरबा। जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा के अंतर्गत आने वाले सभी जनपद सदस्यों और सरपंच संघ ने निर्माण कार्यों की आईडी जारी नहीं होने के विरोध में एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। अपनी मांगों को लेकर नाराज जनप्रतिनिधियों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पोड़ी उपरोड़ा को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि आगामी 7 दिनों के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे जनपद कार्यालय में तालाबंदी और राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-130) पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम व धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे।
जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्यों की आईडी जारी नहीं होने से नाराज जनपद सदस्यों ने 15 जून 2026 को आयोजित सामान्य सभा की बैठक का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया था। इसके बाद जनप्रतिनिधियों ने जनपद कार्यालय में तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन भी किया था। लगातार विरोध के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से जनप्रतिनिधियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सरपंच संघ और जनपद सदस्यों का कहना है कि निर्माण कार्यों की आईडी उपलब्ध नहीं होने के कारण न तो कार्यों की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल पा रही है और न ही भुगतान प्रक्रिया स्पष्ट हो रही है। इससे जमीनी स्तर पर विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और सरपंचों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जनप्रतिनिधियों ने इसे उनके अधिकारों का हनन बताया है।
उन्होंने कहा कि आईडी नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कई बार अधिकारियों से मांग करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया, जिससे जनप्रतिनिधियों का आक्रोश और बढ़ गया है। सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि 7 दिनों के भीतर मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो सभी सरपंच और जनपद सदस्य मिलकर NH-130 (अंबिकापुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग) पर चक्काजाम करेंगे। इसके साथ ही जनपद कार्यालय में दोबारा अनिश्चितकालीन तालाबंदी की जाएगी और मांगें पूरी होने तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन प्रशासन द्वारा उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किए जाने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक निर्माण कार्यों की आईडी जारी नहीं की जाती, तब तक विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं हो सकती। इस पूरे मामले ने स्थानीय प्रशासन के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि अगले 7 दिनों में प्रशासन इस विवाद का समाधान निकाल पाता है या फिर क्षेत्र में बड़े आंदोलन की स्थिति बनती है। प्रशासनिक स्तर पर अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन स्थिति को देखते हुए बातचीत और समाधान की संभावना पर भी चर्चा की जा रही है।