Raipur/Baloda Bazar. रायपुर/बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार वन मंडल से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। अर्जुनी परिक्षेत्र में एक गर्भवती बायसन (गौर) को शिकारियों ने बेरहमी से करंट लगाकर मार डाला, और उसके सिर और पैर काट दिए। यह घटना दिवाली के दो दिन बाद की बताई जा रही है। घटना ने न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि पहले से दी गई चेतावनियों को विभाग ने नजरअंदाज किया। इस घटना की जानकारी पर्यावरण कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने दी है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं पर्यावरण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को एक पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई है। सिंघवी का कहना है कि त्योहारी मौसम में शिकार की गतिविधियां बढ़ने की आशंका को पहले ही विभाग को अवगत कराया गया था, इसके बावजूद फील्ड लेवल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

🔹 चेतावनी के बावजूद वन विभाग लापरवाह
नितिन सिंघवी ने बताया कि उन्होंने दिवाली के कई दिन पहले ही चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन सह प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को पत्र लिखकर यह चेतावनी दी थी कि त्योहारी सीजन, विशेषकर दिवाली और होली के दौरान, फील्ड स्टाफ की निगरानी कमजोर हो जाती है, जिससे शिकार की घटनाएं बढ़ जाती हैं। उन्होंने इस दौरान शरद पूर्णिमा के बाद से लेकर दिवाली तक के दिनों को “हाई रिस्क पीरियड” बताया था, जब कुछ समुदाय पारंपरिक रूप से जंगली जानवरों का शिकार करते हैं। उन्होंने पत्र में सुझाव दिया था कि जहां भी स्निफर डॉग स्क्वाड मौजूद हैं, वहां उन्हें सक्रिय पेट्रोलिंग में लगाया जाए।

बारनवापारा अभ्यारण्य जैसे संवेदनशील इलाकों में भी अस्थायी रूप से तैनात किया जाए। सिंघवी ने अपने पत्र में विशेष रूप से उल्लेख किया था कि जंगल सफारी में मौजूद स्निफर डॉग को दिवाली के दौरान बारनवापारा अभ्यारण्य में भेजा जाए, ताकि उसकी मौजूदगी शिकारियों के लिए भय का कारण बन सके। लेकिन, उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। उनका कहना है कि “मेरे पत्र को सिर्फ औपचारिकता के तौर पर विभिन्न डिवीजनों को फॉरवर्ड कर दिया गया, लेकिन कोई फॉलो-अप या फील्ड एक्शन नहीं हुआ। अगर विभाग ने समय रहते निर्देशों का पालन किया होता, तो शायद उस गर्भवती बायसन और उसके अजन्मे बच्चे की जान बच सकती थी।”

🔹 बायसन का सिर और पैर काटकर ले गए शिकारी
सूत्रों के अनुसार, शिकारी पहले से इलाके की निगरानी व्यवस्था से वाकिफ थे। वन विभाग की कम सक्रियता का फायदा उठाते हुए उन्होंने करंट प्रवाहित तार बिछाकर बायसन को मार दिया। यह भी सामने आया है कि मादा बायसन गर्भवती थी, और उसके पेट में विकसित भ्रूण मौजूद था। शिकारियों ने क्रूरता की सारी सीमाएं पार करते हुए बायसन का सिर और पैर काटकर साथ ले गए। घटना स्थल बलौदा बाजार वन मंडल के अंतर्गत आने वाले अर्जुनी परिक्षेत्र का बताया गया है, जो बारनवापारा अभ्यारण्य के नजदीक है। इस क्षेत्र में पहले भी शिकार की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार वन विभाग की निष्क्रियता ने एक और निर्दोष प्राणी की जान ले ली।

🔹 रायगढ़ में भी करंट से हाथी की मौत
सिंघवी ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वन विभाग की इसी तरह की लापरवाही रायगढ़ वन मंडल में भी देखने को मिली थी, जहां जंगली सूअर के शिकार के लिए बिछाए गए बिजली के तार की चपेट में आकर एक हाथी की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि “जब तक फील्ड में कड़ी मॉनिटरिंग और गश्त नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकना मुश्किल है।”

🔹 वाइल्डलाइफ विंग पर गंभीर आरोप
सिंघवी ने वन विभाग के वाइल्डलाइफ विंग पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “आज विभाग वन्य प्राणियों की सुरक्षा करने के प्राथमिक काम को छोड़कर संवेदनशील इकोलॉजिकल इलाकों में इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में ज्यादा व्यस्त है।” उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव से मांग की है कि वाइल्डलाइफ विंग को यह स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि वे पर्यटन को बढ़ावा देने के बजाय वन्यजीव संरक्षण और एंटी-पोचिंग उपायों पर ध्यान केंद्रित करें।

🔹 मांग: हर डिवीजन में तैनात हों ट्रेंड स्निफर डॉग स्क्वाड
सिंघवी ने पत्र में कहा है कि राज्य के सभी वन्यजीव अभ्यारण, नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में ट्रेंड स्निफर डॉग स्क्वाड की तैनाती की जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि फील्ड स्टाफ के प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों को बढ़ाने की दिशा में त्वरित कदम उठाए जाएं, ताकि त्योहारी सीजन के दौरान शिकार की घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

🔹 वन विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में
फिलहाल, इस दर्दनाक घटना को लेकर वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में गुस्सा और निराशा दोनों है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर फील्ड अधिकारी समय पर सतर्क रहते और गश्त बढ़ाई जाती, तो यह निर्दोष बायसन और उसके अजन्मे बच्चे की जान बच सकती थी। घटना ने एक बार फिर राज्य के वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला केवल एक शिकार की घटना नहीं, बल्कि वाइल्डलाइफ संरक्षण तंत्र की विफलता का प्रतीक बन गया है।
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