सालों से एक ही थाने में जमे पुलिस अधिकारी–कर्मचारी, SSP लाल उम्मेद सिंह ने दिया ये बयान

जनता से रिश्ता के सवाल पर SSP ने दिया ये जवाब

Update: 2026-01-04 16:34 GMT
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में हाल ही में पुलिस विभाग द्वारा जारी तबादला सूची और वास्तविक स्थिति में गहरा अंतर दिखाई दे रहा है। पुलिस कप्तान और प्रशासन की ओर से लंबे समय से एक ही थाने में जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाकर कानून-व्यवस्था में नई ऊर्जा लाने और निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन शहर के कई थाना क्षेत्रों में आज भी वही अधिकारी और कर्मचारी अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।

जनता से रिश्ता के संवाददाता शांतनु रॉय ने इस पर एसएसपी लाल उम्मेद सिंह से सवाल किया कि सालों से एक ही थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी कब अपने-अपने थानों में भेजे जाएंगे। इस पर एसएसपी ने स्पष्ट किया कि जैसे ही ट्रांसफर लिस्ट जारी होती है, सभी पुलिसकर्मी और अधिकारी संबंधित थानों में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। यदि कोई आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि पुलिस सूत्रों के अनुसार, हालिया तबादलों का उद्देश्य लंबे समय से एक ही जगह तैनात पुलिसकर्मियों को हटाकर कानून-व्यवस्था में नई ऊर्जा लाना था। स्वयं रायपुर पुलिस कप्तान लाल उम्मेद सिंह ने संदेश दिया था कि किसी भी थाने या चौकी में वर्षों से जमे अधिकारियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बावजूद इसके, कई थानों में सब इंस्पेक्टर (SI), असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (ASI), प्रधान आरक्षक, आरक्षक और नगर सैनिक भी वर्षों से एक ही क्षेत्र में जमे हुए हैं।

25 साल से रायपुर में जमे ASI का मामला
शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में सबसे चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, एक ASI पिछले करीब 25 वर्षों से रायपुर शहर के थानों में ही तैनात है। ट्रांसफर के नाम पर वह केवल कोतवाली, पुरानी बस्ती, गंज और टिकरापारा थाना क्षेत्रों के बीच ही घूमा। नियमों के अनुसार, किसी भी पुलिसकर्मी को सीमित अवधि के बाद दूसरे जिले या क्षेत्र में भेजा जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में नियम केवल कागजों तक ही सीमित रहे। समान रूप से राजधानी के सटे आरंग क्षेत्र में भी एक नगर सैनिक लंबे समय से एक ही थाने में तैनात है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उसकी पकड़ इतनी मजबूत है कि वह थाना स्तर पर प्रभावशाली भूमिका निभाता है।


लंबी तैनाती और गहरी पैठ
किसी भी पुलिसकर्मी का लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में रहना स्वाभाविक रूप से स्थानीय नेटवर्क बनाने में मदद करता है। सूत्रों का कहना है कि यही नेटवर्क बाद में अवैध कारोबारियों और अपराधियों से सांठगांठ का आधार बन जाता है। रायपुर शहर और आसपास के इलाकों में सट्टा, गांजा, अवैध शराब, जुआ और रेत उत्खनन जैसे कारोबार खुलेआम चलने की शिकायतें लंबे समय से मिलती रही हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मी नियमित रूप से इन अवैध कारोबारियों से वसूली करते हैं और बदले में उन्हें कार्रवाई से संरक्षण मिलता है। यही कारण है कि कई बार शिकायतों के बावजूद मौके पर कोई कार्रवाई नहीं होती या मामूली दिखावटी कार्रवाई कर मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं।

तबादला आदेश बनाम हकीकत
पुलिस कप्तान द्वारा जारी तबादला आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि लंबे समय से एक ही थाने में पदस्थ कर्मियों को हटाकर अन्य स्थानों पर भेजा जाएगा। उद्देश्य साफ था—अपराध नियंत्रण, निष्पक्ष पुलिसिंग और जनता का भरोसा बहाल करना। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि कई अधिकारी 5 से 10 सालों से एक ही थाने में जमे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें से कई अधिकारी न केवल अपराध जगत बल्कि स्थानीय राजनीतिक और आर्थिक नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि तबादला सूची जारी होने के बावजूद वे किसी न किसी तरह उसी थाने या नजदीकी क्षेत्र में पदस्थ बने रहते हैं। कुछ मामलों में तो ट्रांसफर आदेश आने के बाद भी महीनों तक अमल नहीं होता।

अपराधियों से संरक्षण के गंभीर आरोप
शहर के कई थाना क्षेत्रों में यह आम चर्चा है कि सट्टा, गांजा और अवैध शराब के ठिकाने पुलिस की जानकारी में हैं। इसके बावजूद कार्रवाई न होना पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करता है। सूत्रों का दावा है कि कुछ पुलिसकर्मी हर महीने मोटी रकम वसूलते हैं और बदले में अपराधियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। यही कारण है कि अपराधी बेखौफ होकर अपने धंधे चलाते हैं।


जनता में बढ़ता असंतोष
पुलिस पर लगे इन आरोपों से आम जनता में गहरी नाराजगी है। लोग कहते हैं कि जब कानून के रक्षक ही अपराधियों के साथ खड़े नजर आएंगे, तो आम नागरिक की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। चोरी, लूट, नशा, सट्टा और अवैध शराब की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि ट्रांसफर नीति का सख्ती से पालन किया जाए और वर्षों से जमे अधिकारियों को हटाया जाए, तो अपराध पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। लेकिन जब तक आदेश केवल कागजों में रहेंगे, स्थिति में सुधार की संभावना कम है।

नगर सैनिकों पर भी सवाल
आरंग और आसपास के ग्रामीण इलाकों में नगर सैनिकों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ नगर सैनिक सालों से एक ही थाने में तैनात हैं और उनका प्रभाव इतना बढ़ गया है कि थाना प्रभारी भी कई मामलों में उनके बिना कार्रवाई करने से हिचकते हैं। आरोप है कि उनकी शह पर नशा, अवैध शराब, जुआ-सट्टा और रेत उत्खनन फल-फूल रहे हैं।

जूनियर स्टाफ में असंतोष
लंबे समय से जमे अधिकारियों के कारण विभाग के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। कई जूनियर अधिकारी और कर्मचारी चाहते हैं कि ट्रांसफर नियमों का निष्पक्ष पालन हो। उनका कहना है कि कुछ चुनिंदा अधिकारी वर्षों तक टिके रहने से अन्य कर्मचारियों को समान अवसर नहीं मिलते।

क्या बदलेगी तस्वीर?
अब सवाल यह है कि क्या रायपुर पुलिस में ट्रांसफर नीति वास्तव में लागू होगी या यह केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी। जनता और विभाग के भीतर बढ़ते दबाव को देखते हुए पुलिस कप्तान के सामने चुनौती बड़ी है। यदि वर्षों से जमे अधिकारियों को हटाकर निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाती है, तो राजधानी में अपराध नियंत्रण में यह बड़ा कदम साबित हो सकता है। फिलहाल, रायपुर में पुलिस–अपराधी गठजोड़, तबादला नीति की अनदेखी और जनता के भरोसे के संकट ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। प्रशासन को अब तय करना होगा कि वह कब और कितना सख्त कदम उठाता है।
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