Jashpur. जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से पुलिस जांच प्रणाली को कटघरे में खड़ा करने वाला एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिस युवक को पुलिस ने हत्या का शिकार मानते हुए मरा घोषित कर दिया था, वही युवक 61 दिन बाद जिंदा हालत में थाने पहुंच गया। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस को सकते में डाल दिया, बल्कि उस मर्डर केस में गिरफ्तार किए गए आरोपियों और न्यायिक प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक, युवक का नाम सीमित खाखा (30) है, जिसे पुलिस रिकॉर्ड में मृत बताया गया था। 22 अक्टूबर को सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पुरनानगर–बालाछापर के बीच स्थित तुरीटोंगरी जंगल में एक युवक की अधजली हुई लाश बरामद की गई थी। शव एक गड्ढे में पड़ा था और उसका चेहरा समेत शरीर का अधिकांश हिस्सा जला हुआ था, जिससे पहचान बेहद मुश्किल थी।
पुलिस ने मौके पर पंचनामा कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत को हत्या बताया गया, जिसके बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और 238(क) के तहत मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने सीमित खाखा के तीन दोस्तों को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने पूछताछ में कथित तौर पर कमीशन के पैसों को लेकर हुए विवाद में सीमित की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली थी। इसी स्वीकारोक्ति के आधार पर पुलिस ने केस को सुलझा हुआ मान लिया था। लेकिन शनिवार की रात पूरा मामला उस वक्त पलट गया, जब तथाकथित मृतक सीमित खाखा खुद थाने पहुंच गया। सीमित ग्राम पंचायत सिटोंगा की सरपंच कल्पना खलखो के साथ सिटी कोतवाली थाना पहुंचा। सरपंच कल्पना खलखो ने पुलिस को बताया कि सीमित झारखंड से आने वाली एक बस से उतरा और सिटोंगा जाने के लिए ऑटो में बैठा। ऑटो चालक सीमित को पहचानता था। उसने तुरंत फोन कर गांव और फिर पुलिस को सूचना दी कि जिस युवक की हत्या के आरोप में लोग जेल में हैं, वही युवक जिंदा सामने आ गया है।
इसके बाद सीमित को सीधे थाने लाया गया, जहां उसे देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए। पूछताछ में सीमित खाखा ने बताया कि वह रोजगार की तलाश में झारखंड गया था। रांची पहुंचने के बाद वह अपने साथियों से बिछुड़ गया और बाद में गिरिडीह जिले के सरईपाली गांव में खेतों में मजदूरी करने लगा। उसके पास मोबाइल फोन नहीं था, इसलिए वह अपने परिजनों या गांव के लोगों से संपर्क नहीं कर सका। सीमित ने यह भी बताया कि उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उसके नाम पर हत्या का मामला दर्ज हो चुका है और उसके दोस्त जेल में हैं। वह क्रिसमस मनाने के लिए घर लौट रहा था, तभी यह पूरा मामला सामने आया। उसके जिंदा होने की पुष्टि के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
इस मामले में शशि मोहन सिंह ने बताया कि वास्तविक मृतक की पहचान के लिए राजपत्रित अधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई थी। अब यह जांच की जा रही है कि अधजली लाश किस व्यक्ति की थी और गिरफ्तार आरोपियों ने हत्या की बात क्यों स्वीकार की थी। साथ ही, जेल में बंद आरोपियों की रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस सनसनीखेज घटना ने पुलिस जांच, पहचान की प्रक्रिया और स्वीकारोक्ति के आधार पर कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर जंगल में मिली अधजली लाश किसकी थी और इस रहस्य से कब पर्दा उठेगा।