Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में 27 सितंबर को निकलने वाली गणेश प्रतिमा विसर्जन झांकी से पहले डीजे और धुमाल को लेकर विवाद सामने आया है। झांकी के प्रस्तावित मार्ग के आसपास रहने वाले कुछ स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने तेज आवाज में डीजे-धुमाल बजाने का विरोध किया है। सत्ती बाजार और आसपास के इलाके में इस संबंध में पोस्टर भी लगाए गए हैं। दूसरी ओर व्यापारियों ने झांकी के मार्ग में बदलाव की मांग को लेकर रायपुर कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन देने की बात कही है। गणेश प्रतिमा विसर्जन की झांकी जयस्तंभ चौक, मालवीय रोड, सदर बाजार और सत्ती बाजार समेत शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरती है। झांकी में बड़ी संख्या में गणेशोत्सव समितियां शामिल होती हैं और कई समितियों के साथ डीजे एवं धुमाल भी रहते हैं।
पोस्टर में कार्रवाई की चेतावनी
झांकी के मार्ग के आसपास लगाए गए पोस्टरों में डीजे और धुमाल नहीं बजाने की चेतावनी दी गई है। पोस्टर में दावा किया गया है कि सत्ती बाजार समेत चौक के आसपास सभी प्रकार के धुमाल और डीजे प्रतिबंधित रहेंगे। इसका पालन नहीं करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270 के तहत कार्रवाई की बात भी पोस्टर में लिखी गई है। हालांकि पोस्टर किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश के आधार पर लगाए गए हैं और संबंधित क्षेत्र में डीजे-धुमाल पर कोई औपचारिक प्रशासनिक प्रतिबंध लागू किया गया है या नहीं, इसकी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
व्यापारियों ने की रूट बदलने की मांग
सराफा व्यापारी हरख मालू ने कहा कि गणेश झांकी धार्मिक आस्था का प्रतीक है और वे धार्मिक आस्था पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं चाहते। उनका कहना है कि शहर की आबादी और यातायात लगातार बढ़ रहा है, जबकि झांकी के मौजूदा मार्ग में कई सड़कें संकरी हैं। उन्होंने मांग की कि झांकी को मालवीय रोड से सीधे बूढ़ा तालाब की ओर डायवर्ट करने की संभावना पर विचार किया जाए। व्यापारियों के मुताबिक स्वागत के लिए लगाए जाने वाले पंडाल भी वैकल्पिक मार्ग पर लगाए जा सकते हैं। हरख मालू ने बताया कि इस संबंध में कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन दिया गया है। स्थानीय थाना प्रभारी से भी ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है जिससे धार्मिक आयोजन भी सुचारू रूप से हो और स्थानीय लोगों तथा व्यापारियों को परेशानी भी न हो।
तेज आवाज को लेकर भी जताई चिंता
सराफा व्यापारी परमित त्यागी ने डीजे के तेज बेस और आवाज को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अत्यधिक तेज आवाज से खासकर बुजुर्गों को परेशानी होती है। उन्होंने एक पूर्व जुलूस के दौरान तेज साउंड के बीच एक बुजुर्ग को हार्ट अटैक आने का दावा भी किया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। व्यापारियों का कहना है कि बढ़ती आबादी और सीमित जगह को देखते हुए प्रशासन को धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात, ध्वनि और स्थानीय निवासियों की सुविधा के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। फिलहाल व्यापारियों के ज्ञापन और रूट परिवर्तन की मांग पर प्रशासन की ओर से अंतिम निर्णय सामने आने का इंतजार है। झांकी को देखते हुए यातायात व्यवस्था और ध्वनि संबंधी नियमों को लेकर प्रशासन की आधिकारिक गाइडलाइन महत्वपूर्ण होगी।