बिलासपुर रेंज में मरणासन्न कथन पर ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन

छग

Update: 2026-05-27 16:46 GMT
Raigarh. रायगढ़। गंभीर अपराधों की विवेचना को अधिक प्रभावी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज स्तर पर “मरणासन्न कथन” (Dying Declaration) विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला राम गोपाल गर्ग, पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसमें रेंज के विभिन्न जिलों से करीब 200 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य गंभीर मामलों में साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया को मजबूत करना और न्यायालयों में सजा का प्रतिशत बढ़ाना था। कार्यक्रम का संचालन भोजराम पटेल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली द्वारा किया गया। इस दौरान शासकीय अधिवक्ता रजनीकांत ठाकुर को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि अपराध विवेचना के दौरान पीड़ित का मृत्यु पूर्व कथन यानी ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ और डीएनए सहित भौतिक साक्ष्यों का सही संकलन अपराधियों को सजा दिलाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि जांच में छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक गलतियों का लाभ अक्सर आरोपी उठा लेते हैं, इसलिए विवेचकों को कानूनी प्रक्रिया का पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए।
कार्यशाला में शासकीय अधिवक्ता रजनीकांत ठाकुर ने मरणासन्न कथन की कानूनी प्रक्रिया, सावधानियों और न्यायिक महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 2023 की धारा 26 के तहत मृत्युकालिक कथन को मजबूत साक्ष्य माना जाता है। यदि मजिस्ट्रेट द्वारा प्रश्नोत्तर प्रारूप में बयान दर्ज किया जाता है तो उसे न्यायालय में विशेष महत्व दिया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि बयान दर्ज करने से पहले और बाद में डॉक्टर द्वारा पीड़ित के मानसिक रूप से स्वस्थ होने का प्रमाणपत्र लेना अत्यंत आवश्यक है। प्रमाणपत्र नहीं होने की स्थिति में अदालतों द्वारा सजा पलटने के कई उदाहरण सामने आए हैं। कार्यशाला में बालोद के एक मामले का उल्लेख करते हुए अधिकारियों को इस संबंध में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए।
अभियोजन अधिकारियों ने विवेचकों को एफएसएल रिपोर्ट में रक्त समूह का मिलान सुनिश्चित करने, चालान तैयार करते समय कॉपी-पेस्ट से बचने और एससी/एसटी एक्ट के मामलों में जातिसूचक शब्दों का स्पष्ट उल्लेख करने की सलाह दी। साथ ही गवाहों को अदालत में गवाही से पहले कानूनी रूप से तैयार करने पर भी जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को साझा किया। शासकीय अधिवक्ता रजनीकांत ठाकुर ने जप्ती, सैंपलिंग और साक्ष्य संकलन से जुड़ी तकनीकी एवं कानूनी जटिलताओं के समाधान पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं पुलिस विवेचना को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने में मदद करेंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे न्यायालयों में दोष सिद्धि दर बढ़ेगी और गंभीर अपराधों के मामलों में जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी। कार्यक्रम के समापन पर एसएसपी भोजराम पटेल ने सभी प्रतिभागियों और प्रशिक्षकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से विवेचना में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को समझने और उन्हें दूर करने में काफी मदद मिलेगी।
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