मातृ-शिशु अस्पताल में नवजात मौत मामला, लैब टेक्नीशियन के खिलाफ FIR दर्ज

छग

Update: 2026-07-21 14:10 GMT
Rajnandgaon. राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव स्थित शासकीय मातृ-शिशु अस्पताल में नवजात शिशु की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। मामले में जांच के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने लैब रिपोर्ट में कथित गंभीर लापरवाही के आरोप में लैब टेक्नीशियन के खिलाफ बसंतपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, यह मामला 20 जुलाई 2026 का है। ग्राम टोलागांव निवासी कविता मंडावी उम्र 25 वर्ष को प्रसव पीड़ा होने पर रात करीब 2:30 बजे राजनांदगांव जिला चिकित्सालय के शासकीय मातृ-शिशु अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती के बाद चिकित्सकों ने प्रसूता महिला की आवश्यक खून जांच कराने के निर्देश दिए थे। परिजनों ने महिला का ब्लड सैंपल अटल आरोग्य लैब में जांच के लिए भेजा था। आरोप है कि जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। लैब रिपोर्ट अगले दिन दोपहर करीब 12:49 बजे जारी की गई, जिसके कारण चिकित्सकों को आवश्यक समय पर जानकारी नहीं मिल सकी। परिजनों और स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, रिपोर्ट में हुई देरी के चलते सिजेरियन ऑपरेशन की प्रक्रिया प्रभावित हुई और गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई।
इस मामले को लेकर सीएमएचओ ने बसंतपुर थाना प्रभारी को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि जिला चिकित्सालय राजनांदगांव स्थित अटल आरोग्य लैब में कार्यरत एचएलएल हेल्थ केयर लिमिटेड के लैब टेक्नीशियन खोमेन्द्र कुमार द्वारा समय पर ब्लड जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। सीएमएचओ ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए संबंधित लैब टेक्नीशियन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। स्वास्थ्य विभाग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम, लैब रिपोर्ट जारी होने के समय, संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली की जांच करेगी।
इस घटना के बाद मृत नवजात के परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर नाराजगी जताई थी। परिजनों ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। परिजनों का आरोप था कि बच्ची के जन्म के बाद अस्पताल के डॉक्टर नवजात को अपने साथ ले गए, लेकिन उसकी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में परिवार को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना था कि लंबे समय तक उन्हें नवजात की स्थिति से अवगत नहीं कराया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि करीब आधे घंटे तक कोई डॉक्टर या अस्पताल का जिम्मेदार अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया।
परिजनों के अनुसार, बाद में उन्हें केवल कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया और नवजात का शव सौंप दिया गया। इस घटना के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया था। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा था और दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जांच प्रक्रिया शुरू की। जांच के दौरान लैब रिपोर्ट में देरी का मुद्दा सामने आया, जिसके बाद लैब टेक्नीशियन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मरीजों को समय पर जांच और उपचार की सुविधा मिलना बेहद जरूरी है। किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में भी विभाग ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कदम उठाया है। राजनांदगांव के इस मामले ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रबंधन व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव जैसे संवेदनशील मामलों में जांच रिपोर्ट और उपचार में समय की अहम भूमिका होती है। ऐसे में रिपोर्ट में देरी को गंभीर मामला माना जा रहा है। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच में जुटे हुए हैं। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसमें अन्य किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका थी या नहीं। वहीं, परिजनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है।
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