मुस्लिम नाबालिग ने फांसी लगाकर दी जान, भीड़ पर बहनों से छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप

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Update: 2025-10-05 18:21 GMT
Dhamtari. धमतरी। जिले के मगरलोड नगर पंचायत में शुक्रवार की रात एक दर्दनाक और संवेदनशील घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। रावण दहन कार्यक्रम के बाद हुए मामूली विवाद ने इतना विकराल रूप ले लिया कि एक मुस्लिम नाबालिग लड़के ने आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि कुछ युवकों की भीड़ ने उसे उसके घर तक दौड़ाया, घर में घुसकर उसकी बहनों से छेड़छाड़ और उसके साथ मारपीट की। सदमे और डर में आकर लड़के ने कमरे में खुद को बंद कर फांसी लगा ली।


मृतक की मां पीरन बी ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में बताया गया कि शुक्रवार देर रात करीब 1 बजे उनका 17 वर्षीय बेटा अब्दुल लतीफ को कुछ युवक दौड़ाते हुए घर तक पहुंचे और घर के बाहर इकट्ठा हो गए। जब मां ने विरोध किया तो भीड़ ने गाली-गलौज करते हुए अब्दुल को बाहर निकालने की मांग की। डर के माहौल में अब्दुल की बहनों यास्मीन, जास्मीन और अनीशा ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और पुलिस को फोन किया। थोड़ी देर बाद थाने से दो पुलिसकर्मी पहुंचे, लेकिन भीड़ का आक्रोश बढ़ता गया। भीड़ में शामिल कुछ युवकों ने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की।

पीरन बी के मुताबिक, पप्पू सोनी, राज साहू, छत्रपाल साहू, विश्वजीत साहू, दुर्गेश तिलक साहू, योगराज, निखिल, लोमीचंद सहित अन्य आरोपी दीवार फांदकर घर में घुस गए। जब बहनों ने माफी मांगी, तो आरोपियों ने उनके साथ अश्लील हरकतें और छेड़छाड़ की। इसके बाद उन्होंने अब्दुल के साथ बुरी तरह मारपीट की। परिवार ने अब्दुल को एक कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगाया ताकि उसे और नुकसान न पहुंचे। हालांकि, जब पुलिस दोबारा पहुंची और ताला खोला गया, तो अब्दुल लतीफ फांसी पर लटका मिला।
डॉक्टरों
ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में यह सब हुआ और उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। हमलावरों ने धमकी दी कि यदि रिपोर्ट दर्ज कराई गई, तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद जब शव को मगरलोड लाया गया, तो परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। शव को सड़क पर रखकर एक घंटे तक चक्का जाम किया गया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई।


एसपी का बयान
इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने कहा, “यह बहुत संवेदनशील मामला है। मैं स्वयं मौके पर आया हूं। कार्यवाही होकर ही रहेगी।” मगरलोड की यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सामाजिक तनाव और प्रशासनिक लापरवाही मिलकर कैसे किसी मासूम की जान ले सकते हैं। पुलिस की मौजूदगी में इस तरह की घटना होना बेहद चिंताजनक है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन कितनी तेजी और निष्पक्षता से इस प्रकरण में कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाता है।
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