दिल्ली में तीन अहम विधेयकों पर संयुक्त समिति की बैठक में शामिल हुए सांसद बृजमोहन अग्रवाल
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New Delhi/Raipur. नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लिया, जिसमें संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू–कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 पर विस्तृत विचार–विमर्श किया गया। इन तीनों विधेयकों पर समीक्षा के लिए गठित संयुक्त समिति की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि ये विधेयक आगामी समय में देश की संवैधानिक और प्रशासनिक संरचना पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं। बैठक के दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल सहित समिति के सभी सदस्यों ने प्रत्येक विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर गहन चर्चा की।
उन्होंने विधेयकों के उद्देश्य, इनसे होने वाले संभावित सुधारों और इनके तहत प्रस्तावित प्रशासनिक बदलावों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा में यह बात सामने आई कि यह संशोधन देश की शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस संशोधन का लक्ष्य वर्तमान प्रशासनिक ढांचे को समयानुकूल बनाने और बेहतर नीति-निर्माण के लिए आवश्यक बदलाव सुनिश्चित करना है। जम्मू–कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 पर भी विस्तृत मंथन किया गया। यह विधेयक जम्मू–कश्मीर की प्रशासनिक संरचना, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और विकास को नई दिशा देने का प्रयास करता है। बैठक में कहा गया कि यह संशोधन क्षेत्र में स्थिरता, विकास और सुशासन को और मजबूती देगा।
केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 पर हुई चर्चा में समिति के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने, निर्णय प्रक्रिया को सुगम बनाने और स्थानीय शासन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह संशोधन आवश्यक है। बैठक में शामिल सदस्यों का मत था कि तीनों विधेयक मिलकर भारत के संघीय ढांचे को मजबूत करेंगे और शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाएंगे। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने चर्चा में सक्रिय भूमिका निभाते हुए कहा कि ये विधेयक न केवल संवैधानिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, बल्कि नागरिकों तक बेहतर प्रशासनिक सेवाएं पहुंचाने में भी सहायक सिद्ध होंगे। बैठक के अंत में समिति ने इन विधेयकों के संभावित प्रभावों का समग्र मूल्यांकन करने और जल्द ही अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर संसद में प्रस्तुत करने की दिशा में सहमति व्यक्त की।