निज सचिव को मूल विभाग में भेजा गया, संगठन की नाराजगी के बाद बड़ा फैसला
रायपुर (जसेरि)। खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल के निज सचिव संतोष अग्रवाल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आखिरकार बड़ा प्रशासनिक एवं राजनीतिक फैसला सामने आया है। मंत्री के पावरफुल पीए के रूप में चर्चित संतोष अग्रवाल को निज सचिव की जि मेदारी से हटाकर उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है। इस कार्रवाई को लेकर भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं में संतोष की लहर है। बताया जा रहा है कि कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया। इस पूरे घटनाक्रम को जनता से रिश्ता में प्रकाशित खबर के असर से जोड़कर देखा जा रहा है। जनता से रिश्ता ने अपने 31 अगस्त 2026 के अंक में खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल के बंगले में निज सचिव संतोष अग्रवाल की कथित कार्यप्रणाली, उनके बढ़ते प्रभाव तथा भाजपा संगठन एवं कार्यकर्ताओं के बीच कथित नाराजगी को लेकर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। खबर का शीर्षक ही था मंत्री से ज्यादा 'पावरफुलÓ पीए! वहीं खबर की प्रमुख लाइन थी, संगठन से विभाग तक बढ़ी नाराजगी, कार्यकर्ताओं का दावा मंत्री तक पहुंचने से पहले 'फिल्टर' करता है पीए।
जनता से रिश्ता ने पहले ही उठाए थे सवाल: जनता से रिश्ता की प्रकाशित खबर में इस बात को प्रमुखता से उठाया गया था कि मंत्री के निज सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों से लेकर भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं तक में कथित असंतोष की चर्चा है। खबर में यह भी सवाल उठाया गया था कि क्या मंत्री तक पहुंचने के रास्ते में 'फिल्टरÓ की भूमिका निभाने के कारण कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
खबर में मंत्री के बंगले की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल सामने रखे गए थे। इसमें यह उल्लेख किया गया था कि मंत्री के बंगले से लेकर खाद्य विभाग के गलियारों तक निज सचिव की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया था कि संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को मंत्री तक अपनी बात पहुंचाने में किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब खबर प्रकाशित होने के कुछ ही समय बाद संतोष अग्रवाल को निज सचिव पद से हटाकर मूल विभाग में भेजे जाने से इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
संगठन की नाराजगी के बीच आया फैसला: राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, मंत्री के निज सचिव की कार्य प्रणाली को लेकर संगठन के भीतर लंबे समय से नाराजगी की चर्चा थी। कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की शिकायतें तथा मंत्री के कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल संगठन के स्तर तक पहुंचने की बात सामने आ रही थी। इसी बीच जनता से रिश्ता की खबर ने इस मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया। खबर के बाद संगठन स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिए जाने की चर्चा रही। आखिरकार संतोष अग्रवाल को मंत्री के निज सचिव पद से हटाकर उनके मूल विभाग में भेजने का निर्णय लिया गया। हालांकि राजनीतिक हलकों में इसे संगठन और कार्यकर्ताओं की नाराजगी के बीच उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यकर्ताओं में खुशी, आतिशबाजी की भी खबर: संतोष अग्रवाल को हटाए जाने की खबर सामने आते ही भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच खुशी का माहौल बनने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुछ कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर कार्रवाई का स्वागत किया।
सहज-सरल मंत्री के बंगले में फिर लौटेगी रौनक!: खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल को संगठन के भीतर सरल, सहज और कार्यकर्ताओं के बीच आसानी से उपलब्ध रहने वाले नेता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनके बंगले की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार उठ रही चर्चाएं उनके राजनीतिक व्यक्तित्व के विपरीत मानी जा रही थीं। अब संतोष अग्रवाल को निज सचिव की जि मेदारी से हटाए जाने के बाद मंत्री के बंगले में फिर से कार्यकर्ताओं की आवाजाही और सीधे संवाद का माहौल बनने की उ मीद जताई जा रही है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो किसी भी मंत्री के कार्यालय की कार्यप्रणाली में निज सचिव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। वह अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम होता है।
संगठन के लिए भी राहत की खबर: मंत्री के निज सचिव को हटाए जाने का फैसला भाजपा संगठन के लिए भी राहत के रूप में देखा जा रहा है। संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण होता है। खासकर मंत्री के बंगले और कार्यालय में कार्यकर्ताओं की शिकायतों तथा सुझावों को उचित तरीके से मंत्री तक पहुंचाना संगठनात्मक दृष्टि से अहम माना जाता है। ऐसे में यदि कार्यकर्ताओं के बीच यह धारणा बनने लगे कि मंत्री तक पहुंचना आसान नहीं है या बीच में किसी व्यक्ति का अत्यधिक प्रभाव है, तो इसका असर संगठन की जमीनी गतिविधियों पर पड़ सकता है। अब संतोष अग्रवाल को हटाए जाने के बाद संगठन के भीतर यह संदेश जाने की उ मीद है कि मंत्री तक कार्यकर्ताओं की सीधी पहुंच और संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी।
खबर के बाद कार्रवाई, अब आगे किसकी होगी जिम्मेदारी? : संतोष अग्रवाल को मूल विभाग में वापस भेजे जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंत्री दयाल दास बघेल के निज सचिव की जिम्मेदारी अब किसे सौंपी जाएगी? यह नियुक्ति भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संगठन के साथ बेहतर तालमेल रखने वाला और कार्यकर्ताओं के लिए सहज उपलब्ध रहने वाला व्यक्ति मंत्री के निज सचिव की जि मेदारी संभालता है तो इससे मंत्री के बंगले की कार्यप्रणाली को लेकर बनी चर्चाओं पर विराम लग सकता है। फिलहाल संतोष अग्रवाल को मूल विभाग में भेजे जाने के फैसले ने यह जरूर साफ कर दिया है कि मंत्री के बंगले और निज सचिव की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों को संगठन ने नजरअंदाज नहीं किया।
जनता से रिश्ता की खबर का संदर्भ भी महत्वपूर्ण: गौरतलब है कि जनता से रिश्ता के 31 अगस्त 2026 के अंक की वह खबर, जिसकी प्रति सामने है, इसी पूरे मामले पर केंद्रित थी। उसमें बड़े अक्षरों में मंत्री से ज्यादा 'पावरफुल' पीए! शीर्षक के साथ मंत्री के बंगले में संतोष अग्रवाल की भूमिका और कथित बढ़ते प्रभाव को लेकर सवाल उठाए गए थे। खबर में संगठन से लेकर विभाग तक नाराजगी की बात सामने रखी गई थी। अब उसी निज सचिव को पद से हटाकर मूल विभाग में भेजे जाने के बाद जनता से रिश्ता की खबर का असर राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
मंत्री दयालदास बघेल सुलझे हुए, मिलनसार और सहजता से उपलब्ध होने वाले व्यक्ति हैं
मंत्री दयालदास बघेल काफी सुलझे हुए, मिलनसार, कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच सहजता से उपलब्ध होने वाले व्यक्ति हैं। क्षेत्र में ये नाम के अनुरूप दयालु भैया के नाम से फेमस हैं। इनके पीए संतोष अग्रवाल उनको बदनाम करने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रहे थे। प्रदेश में कस्टम मिलिंग, गुड़ खरीदी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गड़बड़ी में भी संतोष अग्रवाल का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा था. उन्हें हटाए जाने पर क्षेत्र के लोग पटाखे फोड़ कर और मिठाई बांटकर खुशियां मनाने की भी जानकारी आ रही है।
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