Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा मंगलवार को सारंगढ़ कलेक्ट्रेट में “रजत जयंती पर्व” के अवसर पर विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे, अपर कलेक्टर प्रकाश सर्वे, आयोग के सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार समेत जिले के विभिन्न अधिकारी और शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर पर दीप प्रज्वलन के साथ हुई। कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने कार्यक्रम में अपना परिचय छत्तीसगढ़ी भाषा में देते हुए कहा कि प्रदेश की मातृभाषा को सम्मान और प्रोत्साहन देना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि कार्यालयीन कार्यों में अधिक से अधिक छत्तीसगढ़ी भाषा का उपयोग किया जाए।
राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने बताया कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री हैं और संस्कृति मंत्री उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। आयोग का उद्देश्य है कि सरकारी चिट्ठी-पत्री, नोटशीट और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में छत्तीसगढ़ी भाषा का प्रयोग हो, जिससे इस भाषा को संस्थागत स्तर पर बढ़ावा मिले। बैठक में भिलाई के कल्याण कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की पहचान उसकी संस्कृति, लोकगीत और परंपराओं से है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी के माध्यम से 57 देशों में छत्तीसगढ़ की पहचान बनाई, वहीं प्रसिद्ध निर्देशक हबीब तनवीर के नाटक “चरणदास चोर” को फ्रांस में सर्वश्रेष्ठ नाटक का खिताब मिला। डॉ. शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा इतनी सरल और अभिव्यक्तिपूर्ण है कि विदेशी भी इसे सहज रूप से समझ सकते हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ी साहित्य का इतिहास बहुत समृद्ध है।
1885 में हीरालाल काव्योपाध्याय ने छत्तीसगढ़ी व्याकरण लिखी थी। 1900 में पंडित माधवराव सप्रे ने पेंड्रारोड से “छत्तीसगढ़ मित्र” नामक पहला छत्तीसगढ़ी अखबार प्रकाशित किया। 1946 में सारंगढ़ राजपरिवार से प्रेरित होकर अंग्रेजी लेखक ने “फोक सांग ऑफ छत्तीसगढ़” पुस्तक लिखी, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का दस्तावेज बनी। डॉ. शर्मा ने कहा कि आज सरकारी भर्ती परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं, फिर भी कई युवा इसे सही तरीके से नहीं समझ पाते। उन्होंने कहा “जब कोई हमारे प्रदेश में रहना चाहता है, तो उसे हमारी भाषा और संस्कृति सीखनी ही चाहिए।” उन्होंने बिलासपुर हाईकोर्ट के जज फकरुद्दीन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने एक फैसला छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखा था, जो गर्व का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि आज रेल, एयरपोर्ट, टीवी चैनल, रेडियो, समाचार पत्र, यहां तक कि व्यापारी भी छत्तीसगढ़ी में प्रचार-प्रसार कर रहे हैं, ऐसे में सरकारी कर्मचारी और अधिकारी भी बोलचाल तथा सरकारी कार्य छत्तीसगढ़ी भाषा में करें। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों और प्रतिभागियों को “छत्तीसगढ़ी से हिंदी” तथा “छत्तीसगढ़ी से अंग्रेजी” पुस्तकों के साथ प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए।