Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की विशेष टीम ने गरियाबंद जिले में नकली कफ सिरप बेचने के मामले में एक मेडिकल संचालक को गिरफ्तार किया है। औषधि परीक्षण प्रयोगशाला से रिपोर्ट मिलने पर यह स्पष्ट हुआ कि सिरप पूरी तरह अमानक और नकली था। खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा हाल के महीनों में दवा दुकानों, थोक विक्रेताओं और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसी सिलसिले में औषधि निरीक्षक, गरियाबंद ने एक संदिग्ध दवा “बेस्टो कॉफ ड्राई कॉफ फार्मूला” का नमूना लिया था।
लेबल पर नहीं थी बैच, निर्माण व एक्सपायरी तिथि
जांच के दौरान औषधि निरीक्षक को संदेह हुआ, क्योंकि उक्त कफ सिरप की शीशी पर बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी तिथि का कोई उल्लेख नहीं था। नियमों के अनुसार, किसी भी औषधि के पैक पर यह जानकारी अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए। नमूना जांच के लिए राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि औषधि गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी और उसे अमानक (Substandard) घोषित कर दिया गया।
निर्माता फर्म ने कहा- यह हमारी बनाई दवा नहीं
रिपोर्ट के आधार पर जब विभाग ने दवा के लेबल पर उल्लेखित निर्माता फर्म से संपर्क किया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि “बेस्टो कॉफ ड्राई कॉफ फार्मूला” नामक यह उत्पाद उनके द्वारा निर्मित नहीं किया गया है। इस जवाब के बाद प्रशासन ने पुष्टि की कि यह नकली औषधि (Spurious Drug) है, जिसका लेबल और पैकिंग जाली थी।
मेडिकल संचालक गिरफ्तार
मामले की विवेचना के बाद विभाग ने कुलेश्वर मेडिकल एंड जनरल स्टोर्स के संचालक सीताराम साहू को गिरफ्तार किया। उस पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आरोपी से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली कफ सिरप की सप्लाई कहां से हुई थी और इसके पीछे कौन सा गिरोह सक्रिय है।
नकली दवाओं के खिलाफ सख्त रुख
खाद्य एवं औषधि प्रशासन छत्तीसगढ़ ने साफ किया है कि नकली या अमानक दवाओं के निर्माण और बिक्री पर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई गई है। विभाग लगातार औषधि दुकानों की जांच कर रहा है और कानून का उल्लंघन करने वालों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध या बिना लेबल वाली दवा की खरीद से बचें, और यदि ऐसी औषधि की जानकारी मिलती है तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें। इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि राज्य में जनस्वास्थ्य और दवाओं की गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।