नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को मिली 20 साल की सजा

छग

Update: 2025-10-31 12:37 GMT
Sarangarh. सारंगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ जिले से एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला सामने आया है। कनकबीरा थाना क्षेत्र की एक नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले आरोपी को अदालत ने 20 वर्ष के सश्रम कारावास और आर्थिक दंड की कठोर सजा सुनाई है। यह निर्णय एएसआई बी.पी. कुर्रे की मजबूत विवेचना और साक्ष्य आधारित जांच का परिणाम माना जा रहा है, जिसने पीड़िता को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यह मामला पॉक्सो प्रकरण क्रमांक 12/2024 से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार, आरोपी भीमदास महंत (22 वर्ष), निवासी सालर, ने 17 वर्षीय नाबालिग से शादी का झांसा देकर कई बार दुष्कर्म किया था। कुछ महीनों बाद जब पीड़िता गर्भवती हो गई, तो मामला तब उजागर हुआ जब उसने सारंगढ़ अस्पताल में गर्भपात के दौरान मृत शिशु को जन्म दिया।

घटना की जानकारी मिलते ही तत्कालीन थाना प्रभारी भगवती प्रसाद कुर्रे (वर्तमान एएसआई, चौकी कनकबीरा) ने अपराध दर्ज कर साक्ष्यों को एकत्र किया। जांच के दौरान डीएनए रिपोर्ट में मृत शिशु का आरोपी और पीड़िता दोनों से जैविक संबंध सिद्ध हो गया, जिससे मामला और भी पुख्ता हो गया। पुलिस ने सभी साक्ष्यों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के साथ अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। 28 अक्टूबर को अपर सत्र न्यायाधीश अमित राठौर, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो एक्ट) सारंगढ़ ने आरोपी को दोषी पाते हुए 20 वर्ष सश्रम कारावास और आर्थिक दंड से दंडित किया। अदालत ने साथ ही राज्य शासन से पीड़िता को आर्थिक प्रतिकर प्रदान करने की अनुशंसा भी की, यह कहते हुए कि पीड़िता को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर गहरी क्षति पहुँची है।

अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रफुल्ल कुमार तिवारी ने प्रभावशाली पैरवी की, जबकि न्यायालय ने विवेचक एएसआई बी.पी. कुर्रे की निष्पक्ष और सटीक जांच की सराहना की। यह फैसला न केवल पीड़िता के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि यदि विवेचना सटीक और प्रमाणिक हो, तो अपराधी कानून के शिकंजे से नहीं बच सकते। इस निर्णय से समाज को यह सशक्त संदेश गया है कि नाबालिगों और महिलाओं के विरुद्ध यौन अपराध करने वालों के प्रति न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन दोनों की शून्य सहिष्णुता की नीति जारी है।
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